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राग-विराग : श्रीलाल शुक्ला ने छोटा किया जीवन का विस्तार

तेज रफ्तार से भागती ज़िन्दगी और उसके पीछे भागते लोग। समय की कमी हर जगह दिखायी देती है। साहित्य रचते समय दोहा, हाइकू, त्रिवेणी, और चौपाई आदि लिखने के अलावा लेखक के ऊपर ऐसा दबाव नहीं होता कि उसे संक्षेप में अपनी कल्पना को संजोना है। लेखक विस्तार में जाना
 
स्वार्थ
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जनगणना में जातियों की गिनती के पक्ष में हम क्यों हैं?

निरुपमा के जाने के बहुत बाद, जब गुबार थम जाए [22 May 2010 | Read Comments | ] दिलीप मंडल ♦ आने वाले दिनों में और कई निरुपमाओं की जान बचानी है तो उस वर्ण व्यवस्था की जड़ों को काटने की जरूरत है, जिसकी अंतर्वस्तु में ही हिंसा है। निरुपमा की हत्या
 
अविनाश
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जनगणना में जातियों की गिनती के पक्ष में हम क्यों हैं?

इस दुनिया में [20 May 2010 | Read Comments | ] विश्‍वदीपक ♦ साहित्य के नाम पर जो कूड़ा करकट पेश किया जा रहा, इसीलिए नहीं पढ़ा जा रहा है और इसीलिए मीडिया में उसे जगह भी नहीं मिल रही है। Read the full story »माओवादियों का लोकतंत्र [20 May 2010
 
अविनाश
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जाति आधारित जनगणना और यथास्थितिवाद की छटपटाहट

मेरी बहन डॉ. संघमित्रा की शादी हुई डॉ. सुरेन्द्र गाड़ेकर के साथ । शादी सुबह सार्वजनिक संडास-सफ़ाई और गौशाला सफ़ाई से शुरु हुई थी। शाम को आशीर्वाद -गोष्ठी में सर्वोदयी मनीषी दादा धर्माधिकारी ने कहा कि इस दम्पति की संतान ’महागुजबंगोड़िया’ होगी । दादा संविधान
 
Aflatoon अफ़लातून
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उफ्फ यह जाति की दीवार !!

कहते हैं 'Truth is stranger than Fiction ' .इस घटना पर यह उक्ति पूर्णतः खरी उतरती है.काफी पहले की घटना है,मेरे गाँव से एक छोटे से लड़के को एक उच्च वर्ग वाले अपने शहर नौकर के तौर पर ले गए.उन दिनों ऐसा चलन सा था.पिता खेतों में काम करता और उनके बच्चे शहरों
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নীরবতার সংলাপ

চমকে যাওয়ার মতোই তথ্য সব। মরিচঝাঁপি। নৈঃশব্দের অন্তরালে গণহত্যার এক কালো ইতিহাস – লিখেছিলেন জগদীশ মন্ডল। তৎকালীন দক্ষিণবঙ্গের এক সাংসদ শক্তি সরকারের সঙ্গে বারবার গিয়েছিলেন কাদামাটি আর সমুদ্রের নোনা জলের গন্ধ-মেশা হোগলা বনের দ্বীপে। তার পর সব
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Reclaiming the Margins of Faded Scrolls

The Mamar Bari is expected to play a central role in the life of any Bengali kid. I was no exception. It was the place Ma would happily run to once every week, and I would happily tag along. It was very apparent to me from very early on, that things
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দয়াময়ীর কথা

বুধমন্ডলী আজ্ঞা করেন গ্রন্থ পর্যালোচনা, সম্পাদক দাবী করেন পুস্তক সমালোচনা, বন্ধু জানতে চান পাঠপ্রতিক্রিয়া– এক্ষণে আপনার মনোভাবটির প্রত্যাশী, পাঠক। হে পাঠক, ঘড়ির কাঁটার সঙ্গে দৌড়চ্ছেন আপনি, বঙ্গভাষায় লেখাপত্তরের সুলুকসন্ধানে আপনার আগ্রহ কম- জানি তা।
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উন্নয়ন, বিভাজন ও জাতি : বাংলায় নমশূদ্র আন্দোলন, ১৮৭২-১৯৪৭

১ জাতিবিভাগ, শ্রেণী আর ক্ষমতার সম্পর্কের মধ্যে প্রাক-ঔপনিবেশিক বাংলার সনাতন হিন্দু সমাজে যে ভারসাম্য ছিল (রায়, ১৯৮০, পৃঃ ৩২৪-২৫; সান্যাল, ১৯৮১, পৃঃ ১৯-২৬), ইংরেজ ঔপনিবেশিক সরকার নতুন নতুন সুযোগ-সুবিধা তৈরি করতে থাকলে তা ভেঙে পড়ার উপক্রম হয়। সাধারণ ধারণা
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Marichjhapi – Uncovering the Veil of Silence

(Continued from Part 1 : The Silence of Marichjhapi) Thus a population of approximately 30,000 settled in Marichjhapi and carried on their business, trade and occupation unaided by Government and solely relying on their enterprising skills to sustain
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Spit in your face ..leaving you looking like an oppressed Harijan. - Swaminathan S Anklesaria Aiyar

P arpanisam never dies :-((Some Aiyar writes in TOI (16 Dec 2007) using Dalit community for dirty example.// It means that a takeover target can spit in your face and say that mere association with you will be demeaning, leaving you looking like an
 
கல்வெட்டு (எ) பலூன் மாமா
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