इक्कीसवीं सदी में पूंजीवाद की समझ और समाजवाद की तलाश : लोहिया की मदद से/ लेखक -सुनील
पूंजीवाद एक बार फिर संकट में है। पिछले दिनों आई जबरदस्त मंदी ने इसकी चूलें हिला दी है और दुनिया अभी इससे पूरी तरह उबरी नहीं है। पूंजीवाद का संकट सिर्फ बैंकों, कंपनियों व शेयर बाजार तक सीमित नहीं है। दुनिया में भूखे, कुपोषित, बेघर और बेरोजगार लोगों की
Feb 22 2010 07:45 AM



Shuffle








