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saat sakkam trechalis

I recently read Kiran Nagarkar's book "Saat Sakkam Trechalis".This literally means "Seven and six equal forty three". On the bottom of the cover page, one can see written "kya farak padta hai" = "how does it matter?" and below that the reaction (and not
 
koustubh kulkarni
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पत्रिका ही नहीं संवाद का माध्यम ‘शब्द शिल्पियों के आसपास’

पत्रिका: आसपास, अंक: जून10, स्वरूप: मासिक, संपादक: राजुरकर राज, पृष्ठ: 24, मूल्य 5रू.. (वार्षिक 50रू.), ई मेल: , वेबसाईट/ब्लाॅग: , फोन/मो. 0755.2772051, सम्पर्क: एच..03, उद्धवदास मेहता परिसर, नेहरू नगर, कोटरा, भोपाल म.प्र.संवाद पत्रिका के इस अंक में
 
अखिलेश शुक्ल
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Loyalists lie to shield Pawar | Author fights to publish Sonia Gandhi book

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हिन्‍दी पुस्‍तकों का एक खजाना...मुफ्त में

शिक्षाविद अरविन्‍द गुप्‍ता ने एक पूरा खजाना अपनी वेबसाइट पर हमारे आपके लिए उपल्‍ब्‍ध करवाया है एकबारगी तो विश्‍वास ही नहीं हुआ कि इतनी शानदार किताबें नेट पर उपलब्‍ध हैं। खासतौर पर यदि आप शिक्षक हैं या शिक्षा अथवा बच्‍चों में आपकी कोई रुचि है तो इन
 
मसिजीवी
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किताबों की दुनिया - 17

मन में उतर रहे हैं किसी संत के चरण ग़ज़लें उतर रहीं हैं भजन के लिबास में आप लोग अकसर मुझे कहते हैं की मैं शायरी की किताबों के बारे में लिख कर बहुत बड़ा काम कर रहा हूँ और मैं हर बार आपकी इस बात का खंडन करता हूँ. बहुत बड़ा काम तो उनका है जो इस दौर में
 
नीरज गोस्वामी
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खुला जीवन रहस्य: ‘द सिक्रेट’

क्या जीवन के सभी आयामो मे काययाबी हासिल करना संभव है? क्या सफल जिंदगी के कुछ खास सूत्र है? क्या इससे संबंधित कोई नियम है? मित्रो, इस सवाल का जवाब देना आसान बात नही। इसी के संदर्भ मे कुछ दिन पहले एक जबरदस्त किताब हाथ लगी। ऑस्ट्रेलियन लेखिका र्‍हॉंडा ब
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एक बार फिर पाठ्य-पुस्तकों में बदलाव :कुछ बढ़िया पर कुछ भ्रम पूर्ण

नेशनल कैरिकुलम फ्रेमवर्क के सुझावों के बाद राज्य शैक्षिक अनुसंधान परिषद ( एससीईआरटी ) ने किताबों के कलेवर और कोर्स में बदलाव की प्रक्रिया काफी पहले से ही शुरू कर दी थी। इस बार करीब पन्द्रह किताबों के कलेवर और कोर्स में बदलाव किया गया है। जहाँ तक मेरी
 
प्रवीण त्रिवेदी...प्राइमरी का मास्टर
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कथा बिंब-------कथा प्रधान त्रैमासिक पत्रिका

पत्रिका-कथा बिंब, अंक-जुलाई-सितम्बर.08, स्वरूप-त्रैमासिक, प्रधान संपादक-माधव सक्सेना ‘अरविंद’, संपादिका-मंजुश्री, पृष्ठ-52, मूल्य-15रू.,(त्रैवार्षिक125रू), संपर्क-ए-10, बसेरा, आॅफ दिनकारी रोड़, देवनार मुंबई 400.988 महाराष्ट्र (भारत) कथा प्रधान पत्रिका
 
अखिलेश शुक्ल
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पूर्वग्रह----------साहित्य एवं कलाओं की आलोचना त्रैमासिकी

पत्रिका-पूर्वग्रह, अंक-जन.-मार्च2009, स्वरूप-त्रैमासिक, प्रधान संपादक-डाॅ. प्रभाकर श्रोत्रिय, पृष्ठ-124, मूल्य-30रू.,(वार्षिक150रू), संपर्क-भारत भवन न्यास, ज. स्वामीनाथन मार्ग, श्यामला हिल्स, भोपाल 462.002 (भारत) विश्व प्रसिद्ध साहित्य एवं कला केन्द्
 
अखिलेश शुक्ल
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मेरा हर शब्द है,...........

मेरा हर शब्द है, मेरी ही किताब की तरहां, रेखाओं में छिपे जज़बात, उस गुलाब की तरहां, जिसकी हर पंखुङी, दर्द के कांटों से बनी, जिसके आंसू हैं, प्यालों में शराब की तरहां, मेरा हर शब्द है, मेरी ही किताब की तरहां।। कहीं पर कुछ छूट गया, और कहीं अफसाने हैं ब
 
PREETI BARTHWAL
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