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कैसे पत्रकार थे, दर्द नहीं देह देख रहे थे!

गजाला यहां के मीडिया के लिए ‘अहम किरदार’ हैं। जब भी भोपाल गैस त्रासदी का जिक्र आता है, हर मीडिया हाउस उनके पास पहुंच जाता है। ऊपर उनका छोटा सा परिचय देना इसीलिए जरूरी था। विधवा कॉलोनी यहां की ऐसी कॉलोनी है, जिसमें अधिकतर महिलाओं के शौहर
 
अविनाश
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गैस त्रासदी मामले में मूल दस्तावेजों से हेराफेरी

गैस त्रासदी मामले में लापरवाही से हुई मौत की धारा 304ए में एफआईआर कायम की गई। यूनियन कार्बाइड के पांच अधिकारियों को गिरफ्तार भी किया गया। लेकिन दो दिन बाद जब उनमें से चार लोगों को अदालत में पेश कर रिमांड पर लिया गया तो पुलिस और अदालत दोनों के दस्तावेजों
 
नयनसुख
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गोरी चमड़ी के समक्ष घुटने टेकते नेता!

पत्रकार, लेखक, चिंतक डॉ. वेदप्रकाश वैदिक देश की वर्तमान दुरावस्था पर दुखी हैं। उनका हृदय रो रहा है। मेरे मित्र हैं, दुखी मैं भी हूं। वे जानना चाहते हैं कि हर मौके पर, चाहे अवसर यूनियन कार्बाइड द्वारा दी गई त्रासदी का हो, डाऊ केमिकल्स का हो या परमाणु
 
एस.एन. विनोद !
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हमारे सैकड़ों भोपाल - वेदप्रताप वैदिक

भोपाल का हादसा हमारे हिंदुस्तान का सच्चा आईना है। भोपाल ने बता दिया है कि हम लोग कैसे हैं, हमारे नेता कैसे हैं, हमारी सरकारें और अदालतें कैसी हैं। कुछ भी नहीं बदला है। ढाई सौ साल पहले हम जैसे थे, आज भी वैसे ही हैं। गुलाम, ढुलमुल और लापरवाह! अब से 264 साल
 
नयनसुख
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राजनीतिक प्रलाप और घडियाली विलाप नहीं, कार्रवाई करो सरकार

1984 में मैं बहुत छोटा था इसलिए 2-3 दिसंबर की रात भोपाल में क्‍या हुआ उसे सिर्फ किताबों में पढकर और कुछ लोगों से सुनकर ही जान सका। नौकरी के सिलसिले में पिछले 4-5 साल से भोपाल और इंदौर में हूं। इस दौरान उस काली रात के बारे में जो कुछ भी सुना वह 7 जून को
 
प्रदीप
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आखिर जनांदोलन ने तोड़ ही दी सत्ता की कुंभकर्णी निद्रा

भोपाल गैस त्रासदी पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए बढ़ी तत्परता-राजेश त्रिपाठीभोपाल गैस पीड़ितों को अब राहत की सांस लेनी चाहिए क्योंकि उनकी करुण पुकार सत्ता के शीर्ष तक पहुंच गयी है। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने आनन- फानन फरमान जारी कर दिया है कि भोपाल गैस
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यह कैसा बाप जो बेटों के हत्यारे को बचाता है...

भोपाल गैस कांड में जिला अदालत के फैसले के बाद इस मामले की कई परतें खुल कर सामने आई हैं। कुछ ऐसी सच्चाई भी सामने आई है जिससे देश की जनता अभी तक अनजान थी। लेकिन जो सच सामने आया है, उससे एक बार फिर यह बात साबित हो गई है कि मुल्क की जनता जो सरकारें चुनती है,
 
पूनम पांडे
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"एंडरशन को भगाने की जांच का काम हुआ पूरा, उसे भगाने के पीछे रतन नूरा."

उधर वारेन एंडरशन अपने घर के सामने बैठे बागवानी और घर के भीतर बैठे फ़ुटबाल वर्ल्डकप के मज़े ले रहा है और इधर हम उसके बारे में बतिया रहे हैं. कयास लगा रहे हैं कि किस माई के लाल ने उसे भोपाल से दिल्ली और दिल्ली से अमेरिका जाने दिया? जैसे वनोत्सव में पेड़
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कोई नहीं देख रहा पीड़ितों का दर्द

भोपाल गैस त्रासदी। सदी का सबसे भयानक हादसा। हजारों मरे। लाखों पीड़ित। ङोल रहे हैं दंश। आने वाली पीढ़ियां भी ङोलेंगी। बड़ी आस लगाए। बैठे थे लोग। अदालत से मिलेगा इंसाफ। जख्मों पर लगेगा मरहम। लेकिन फैसले ने। जख्मों पर नमक। छिड़क दिया। यह कैसा न्याय। देर भी।
 
मधुकर
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भोपाल त्रासदी, अर्जुन सिंह, और विदेशी मेहमान एंडर्सन

पहले पढ़िए यह खबर: अर्जुन सिंह को गिरफ्तार करने की मांग (क्लिक करें) (http://in.jagran.yahoo.com/news/national/politics/5_2_6488322.html) और फिर मेरे खयालात: यह देश चमत्कारी पुरुषों का है, देवी-देवताओं का है, समर्थ जनों का है, जिन पर कोई नियम-कानून लागू
 
योगेन्द्र जोशी
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लाशों का सौदागर कौन?

पंकज शुक्लविधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका तीनों हैं बराबर दोषी कहते हैं कि दर्द का हद से गुजर जाना दवा बन जाना होता है। लगता है कि भोपाल के गैस पीडि़तों के दुखों के साथ भी यही हो रहा है। 25-26 साल के इंतजार के बाद जो फैसला आया है, उसे सबने 'कमजोरÓ,
 
Pankaj Kumar Shukla
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सारा देश भोपाल के साथ, हम किसका मुंह तक रहे हैं?

कल्पेश याग्निकमुट्ठी भर मठाधीश, पांच लाख निर्दोषों को छल रहे हैं। पूरे 26 बरस से। तब ये बेगुनाह निर्ममता से बर्बाद कर दिए गए। अब निर्लज्जता से प्रताड़ित किए जा रहे हैं। कानून के नाम पर। किंतु अन्याय की सीमा होती है। न्याय करने वाले हर व्यवस्था में होते
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एंडरसन से बडे अपराधी हैं मोती सिंह

भोपाल गैस कांड के फैसले के बाद अब राजनैतिक फिजां में एक बार फिर गर्माहट महसूस की जाने लगी है। साल दर साल चुप्पी साधने के बाद अब सेवानिवृत लोगों की जुबानों के ताले टूटने लगे हैं। इसी क्रम में इस हादसे के वक्त भोपाल के तत्कालीन जिला दण्डाधिकारी ने खुलासा
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भोपाल-तीन : राजेन्द्र राजन

सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिए गए भोपाल गैस कांड संबंधी फैसले से हर देश प्रेमी आहत हुआ है | पचीस साल पहले राजेन्द्र राजन ने इस मसले पर कवितायें लिखी थीं , इस निर्णय के बाद यह कविता लिखी है | भोपाल-तीन हर चीज में घुल गया था जहर हवा में पानी में
 
Aflatoon अफ़लातून
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राजनेताओं, जाच करने वालों जितने ही जिम्मेदार है माननीय जस्टिस अहमदी ...

भोपाल गैस नरसंहार के जितने राजनेता दोषी है, जितने जांच कर रहे आला अफसर दोषी है उतनी ही न्यायपालिका.बेबस गैस पीड़ित अपने परिवार को खोकर दर दर गुहार लगाते रहे, हर दरवाजे पर सोने का जूता खाये हुये सौदागर मौजूद थे और हर दरवाजे से गैस पीड़ितों को निराशा सिर्फ
 
नयनसुख
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राजीव का 'मेरा भारत महान'!

राजीव गांधी प्रतिपादित 'मेरा भारत महान' की आज बरबस याद आ रही है। सचमुच महान ही तो है यह लोकतांत्रिक भारत देश जहां का कानून मंत्री घोषणा करता है कि हजारों लोगों की मौत और लाखों लोगों के विकलांग हो जाने की त्रासदी के मामले को भारत की सर्वोच्च अदालत 'ट्रक
 
एस.एन. विनोद !
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कब तक खून चूसेंगे परदेसी और परजीवी

आशुतोषदुनियां की सर्वाधिक लोमहर्षक औद्योगिक दुर्घटना भोपाल गैस त्रासदी का मुख्य आरोपी और यूनियन कार्बाइड का निदेशक वॉरेन एंडरसन घटना के चार दिन बाद भोपाल आया और औपचारिक गिरफ्तारी के बाद 25 हजार रुपये के निजी मुचलके पर उसे छोड़ दिया गया। 15 हजार से अधिक
 
पवन कुमार अरविन्द
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भोपाल-तीन : राजेन्द्र राजन

सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिए गए भोपाल गैस कांड संबंधी फैसले से हर देश प्रेमी आहत हुआ है | पचीस साल पहले राजेन्द्र राजन ने इस मसले पर कवितायें लिखी थीं , इस निर्णय के बाद यह कविता लिखी है | भोपाल-तीन हर चीज में घुल गया था जहर हवा में पानी में
 
Aflatoon अफ़लातून
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वारेन एंडरसन को कैसे नहीं छोड़ा जाता-अर्जुन सिंह के ट्रस्ट को भी भवन निर्माण के लिये यूनियन कार्बाइड ने डेढ़ लाख दिये.

वारेन एंडरसन को पकड़ा गया, फिर डी०एम०-एस०पी० के पास मुख्य सचिव का निर्देश आता है कि उसे छोड़ दिया जाये. जो पुलिस किसी आम आदमी को शनिवार को गिरफ्तार करती है और थाने से जमानत होने लायक जुर्म में भी जमानत नहीं देती जिससे कि वह आदमी दो दिन हवालात में बिता सके,
 
भारतीय नागरिक - Indian Citizen
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ये हैं यूनियन कार्बाइड लि.द्वारा स्थापित ट्रस्ट के आजीवन चैयरमैन एवं एवं भूतपूर्व मुख्य न्यायाधीश ए. एम. अहमदी.

माननीय ए.एम. अहमदी 1994 से लेकर 1997 तक भारतीय सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश रहे हैं.भोपाल गैस नरसंहार के बाद केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो ने यूनियन कार्बाइड इन्डिया लि. के विरुद्द धारा 304 (II) में मुकदमा चलाने की सिफारिश की जिसमें दस साल तक की सजा
 
नयनसुख
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भोपाल त्रासदी

त्रासदी के पच्चीस साल बाद हमारे पास सोचने के लिए क्या है?कि वॉरेन एंडरसन को देश से बाहर किसने जाने दिया? कि क्या उन्हें हम वापस भारत ला सकते हैं?कि राजीव गांधी को दिसम्बर 1984 में सलाह देने वाले लोग कौन थे? श्रीमती गांधी की हत्या के बाद प्रधानमंत्री
 
प्रमोद जोशी
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... तो जनता सिखा देगी सबक!

चाटुकार नेता अब और 'कोरस' न गाएं। दिग्विजय सिंह, वसंत साठे के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी के विशेष सचिव रह चुके पी.सी. अलेक्जांडर ने, संकेत में ही सही, यह स्पष्ट कर दिया कि राजीव गांधी के कहने पर ही मध्यप्रदेश के तब के मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह
 
एस.एन. विनोद !
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साँप सालों पहले निकल गया, लकीर अब तक पीट रहे हैं

साँप तो निकल कर जा चुका है, और जिसे मौका लग रहा है वही लकीर पीट रहा है। जब मामले में अदालत का निर्णय आया तो न्यायपालिका को कोसा जा रहा था, साथ ही दंड संहिता की खामियाँ गिनाई जा रही थीं। निश्चित ही न्यायपालिका का इस में कोई दोष नहीं। उस का काम सरकार
 
दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi
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एंडरसन के पलायन का जिम्मेदार कौन?

“यूनियन कारबाइड” विभीषिका पर काफी टिप्पणी चल रही है. घटना मध्य प्रदेश की है. पुलिस केस भी वहीं का है. भोपाल के तत्कालीन जिलाधीश श्री मोती सिंह और तत्कालीन नागरिक उड्डयन विभाग के प्रभारी श्री आर.सी. सोंधी का बयान भी तत्कालीन मुख्यमंत्री श्री
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भारत की सरकार न्यौत चुकी है भोपाल से भी बड़ा जीनोसाइड... भारत क्या तुम इसके लिये तैयार हो?

भोपाल की टीस फैसले के बाद उभर चुकी है. मुनाफे के वहशी भेड़ियों के द्वारा किया गया वह कत्ले-आम बाहर वालों के लिये सिर्फ चंद तस्वीरें बन कर रह गया है लेकिन भोपाल वालों के सीने में अब भी धधक रहा है. 20,000 लोगों की मौत पर मारा गया $470 मिलियन का तमाचा, आज़ाद
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क्या सिर्फ अर्जुन सिंह ने किए थे सारे फैसले? -आलोक तोमर

भोपाल के हजारों अभागे गैस पीड़ितों का कानूनी श्राद्ध पूरा हो पाता उसके पहले राजनैतिक कपाल क्रियाएं शुरू हो गई है। अब यह सबको मालूम है कि अर्जुन सिंह ने यूनियन कार्बाइड के चेयरमैन वारेन एंडरसन को सरकारी मेहमान की तरह बाइज्जत गिरफ्तार कर के तीन घंटे में
 
नयनसुख
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भोपाल !

छवि गुगुल से साभारवो अशुभ काली रात उनकी, राह में मौत पसर गई,लाशों के कफ़न बेच कुछ की जिन्दगी बसर गई! जो त्रासदी में बच गए वे,अपंग देह का बोझ ढ़ोकर,न्याय पाने की उम्मीद में, सदी चौथाई गुजर गई! क़ानून, न्याय-व्यवस्था के वो बन फिरते है रहनुमा,इंसाफ का दम भरने
 
पी.सी.गोदियाल
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भोपाल तब भी रोया..भोपाल अब भी रो रहा है

आज कल हर खबरिया चैनल भोपाल गैस कांड की परते खोलने में लगा हुआ है....25 साल बाद ही सही चलो एक-एक करके इन सबकी नींद तो खुली...अब एक-एक रहस्य से पर्दा उठ रहा...हम भी एक खबरिया चैनल में काम करते हैं तो हम भी लगे हुए बाल की खाल पटाने में...लेकिन पूरे मामले को
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भोपाल मर रहा था, अर्जुन सिंह जहाज में उड़ रहे थे

आनंद स्वरूप वर्मा ♦ तीसरी दुनिया के देशों को अपनी चारागाह बनाने वाले मौत के सौदागर अमरीकी साम्राज्यवादियों की मुनाफाखोरी को बढ़ाने के लिए इनके अनुग्रह पर पलने वाले मंत्रियों और अफसरों की सुविधालोलुपता ने हजारों बेगुनाहों को मौत के घाट उतार दिया। इस
 
अविनाश
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लो क सं घ र्ष !: एंडरसन की चाकरी- भोपाल गैस काण्ड

(मेरा क्या कर लोगे)यूनियन कार्बाईड के प्रमुख वारेन एंडरसन की गिरफ्तारी के बाद शासक दल ने और सरकार के अधिकारियों ने जिस तरह से उसकी मदद की है वह अपने में एक महत्वपूर्ण उदहारण है । वैचारिक स्तिथि में हम लोग यूरोपीय और अमेरिकन भक्त हैं हमारे वहां का
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भोपाल गैस कांड -कुछ सवाल

भोपाल गैस कांड से कुछ सवाल उठाते है - जैसे कि क्या किसी भारत के आम आदमी के सहायता हेतु भारत का कोई भी मुख्य मंत्री अपनी प्लेने दे सकता है ? कोई मुख्य सचिव सीधे फ़ोन उठा कर किसी आम जनता की रवानगी के लिए कदम उठा सकते है, कोई पुलिस अधीक्षक किसी आम जनता के
 
imnindian
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आकाशवानी

भोपाल गैस कांड और ग्लोबल मीडिया की लताडभोपाल गैस कांड पर जबसे फैसला आया है तब से सरकार पर भारत समेत पूरे विश्व के मीडिया की भौएं तिरछी हो गई हैं। भरतीय मीडिया ने तो अपना विरोध जताया ही है और सरकार और कानून व्यवस्था को जम कर खरीखोटी सुनाई है मगर अब इस
 
आकाशवानी
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इन्होंने बेच खाए गैस पीड़ितों के कफ़न...

(उपदेश सक्सेना)भोपाल गैस कांड पर हाल में आये फैसले के बाद बहुत लोगों ने इस बारे में काफी कुछ लिखा, अपना विरोध प्रगट किया, मगर मेरे नज़रिए से इस बारे में एक ऐसा मुद्दा अछूता रह गया है जिस पर भी गौर किया जाना बेहद ज़रूरी है. भोपाल के हज़ारों-लाखों गैस पीड़ितों
 
उपदेश सक्सेना
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भोपाल हम शर्मिंदा हैं

यह देश तुम्हें न्याय नहीं दिला सका-राजेश त्रिपाठीभोपाल गैस त्रासदी पर न्यायालय के निर्णय पर कोई टिप्पणी करने का हमें अधिकार नहीं। हम गणतंत्र देश के वासी हैं, जहां हर तरह की आजादी है लेकिन सत्ता और न्याय के सर्वोच्च पद इतने ऊंचे हैं कि वहां आम भारतीय के
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Union Carbide Rap

Listen to a musical outrage on Bhopal Gas Disaster
 
Mahendra Arya
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क्या ये जनद्रोही नहीं हैं ??????????

घड़ियाली आँसूकौन लेकर रहेगा इंसाफ ?26 साल पहले ये सब कहाँथे जब भोपाल के चंद कलाकारों, संस्कृतिकर्मियों, समाजसेवियों ने गैस पीड़ितों के कंधे से कंधा मिलाकर उनके लिए संघर्ष किया, पुलिस प्रशासन का अत्याचार सहा, लाठियाँ खाई, जेल तक गए। तब ये सारे घड़ियाली आँसू
 
दृष्टिकोण
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भारत में जान गाजर-मूली के भाव

भोपाल गैस कांड के फैसले ने बताया देशवासियों की जान गाजर-मूली के भावजो जहां सोया था जहरीली गैस ने उसे हमेशा के लिए वहीं खामोश कर दियामासूम की मौत छोड़ गया कई सवाल (१) : २ और ३ दिसंबर, १९८४ की रात भोपाल में क्या हुआ?(२) : उसके बाद अर्जुन सिंह की अगुआई वाली
 
shoonya
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आकाशवानी

भोपाल गैस कांड26 साल के लंबे इन्तेजार के बाद जब भोपाल गैस कांड का फैसला आया तो पीडितों समेत सभी लोगों के होश ही फक्ता हो गये। जिस हादसे को इतिहास के सबसे भयावह हादसों की संज्ञा दी गई हो और जिसमें 15000 से अधिक जाने लील ली गई हों उसके दोषियों को महज दो
 
आकाशवानी
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