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सवाल गुरुओं से !

 बहुत साल पहलेजब ये सब नहीं हुआ था,होता तब भी था ,किन्तु परदे में छुपा था.मेरा मन तब भीइनसे खफा था.वह प्रवचन दे रहा थाभीड़ से भरे पंडाल मेंगुरु की वाणीईश्वर का आदेशतभी मेरा अंतर बोला -'चाहे रखा होबहुरुपये ने वो वेश?'आत्मा शुद्ध होवाणी औ' मन
 
रेखा श्रीवास्तव
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