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आलूबड़ा

अजित वडनेरकर जी के 'शब्दों के सफ़र'  पर आज ३१-०५-१० को ये नाश्ता मिला :-आलूबड़ा छोटा नही पसंद, 'बड़ा' खा रहे है हम,खाके, पचाके 'छोटा' ही बतला रहे है हम.घर है, न है दुकान, सड़क किसके बाप की!'वट' वृक्ष बनके फैलते, बस जा रहे है
 
Mansoor Ali
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आडम्बर

अजित वडनेरकर जी, आज[२४-०४-१०/shabdon ka safar]  फिर आपने प्रेरित  किया है , आडम्बर के लिए, विडम्बना के साथ खेलना पड़ रहा है:-__________I [मैं]  P ह L ए ==========आ ! डम्बर-डम्बर खेले,वो मारेगा तू झेले , जो हारेगा वो
 
Mansoor Ali
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गो-डावून [going down]

गो-डावून [going down][अजित वडनेरकरजी की आज{१७-०३-१०} की पोस्ट  गोदाम, संसद या डिपो में समानता से प्रेरित होकर]''माल'' हमने ''चुन'' के जब  पहुंचा दिया गोदाम में.शुक्रिया का ख़त मिला; ''अच्छी मिली 'गौ' दान में. पंच साला ड्यूटी देके लौटे, साहब हाथ
 
Mansoor Ali
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कानून, प्रशासन और आम आदमी...

कानून, प्रशासन और आम आदमी...अंधे कुए में झाँका तो लंगड़ा वहां  दिखा,पूछा, की कौन है तू यहाँ कर रहा है क्या?बोला, निकाल दो तो बताऊँगा माजरा,पहले बता कि गिर के भी तू क्यों नही मरा? मैं बे शरम हूँ, मरने कि आदत नही मुझे,अँधा था मैरा दोस्त यहाँ पर पटक
 
Mansoor Ali
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शीत युद्ध/cold war

खान idiots है, टाइगर genie ?, yes!दोनों मुंबई से प्यार करते है.........!जब भी मौक़ा मिला बिना चूके,एक दूजे पे वार करते है.-मंसूर अली हाश्मी   cAsE sENsitIve
 
Mansoor Ali
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नुस्ख़ा

नुस्ख़ाबढ़े ठंडक ! तो इतना काम कर जा ,'अमर' बन, इस्तीफा देकर गुज़र जा.बदल ले भेष*, ग़ालिब कह गए है,तू खुद अपना ही तो 'कल्याण' कर जा.'नदी' की 'त'रह बहना खुश नसीबी,  [N D T]तकाज़ा उम्र का लेकिन ठहर जा.करे 'आशा'ए तेरी 'राम' पूरी, ज़रा तू 'लालसाओं' से उभर
 
Mansoor Ali
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