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अटल बिहारी वाजपेयी : कवि की उलझन
राह कौन सी जाऊँ मैं? चौराहे पर लुटता चीर चलूँ आखिरी चाल कि बाजी छोड़ विरक्ति सजाऊँ? सपना जन्मा और मर गया मधु ऋतु में ही बाग झर गया तिनके टूटे हुये बटोरुं या नवसृष्टि सजाऊँ मैं? राह कौन सी जाऊँ मैं? दो दिन मिले उधार में घाटों के व्यापार में कौड़ी कौड़ी का
Jun 03 2010 09:23 AM



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