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अपने सदगुरु स्वयं बने-विश्व पर्यावरण दिवस पर विशेष लेख (apne sadguru svyan bane-paryavaran par lekh)

पर्यावरण के लिये कार्य करने पर माननीय जग्गी सद्गुरु को सम्मानित किया जाना अच्छी बात है। जब कोई वास्तविक धर्मात्मा सम्मानित हो उस पर प्रसन्नता व्यक्त करना ही चाहिए वरना यही समझा जायेगा कि आप स्वार्थी हैं। आज विश्व में पर्यावरण दिवस मनाया जा रहा है। दरअसल
 
दीपक भारतदीप
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एक सूरजमुखी आत्मा : विन्सेंट वान गोघ

http://prosepot.blogspot.com/2010/06/blog-post.htmlअभी अभी एक किताब ख़तम की है , "लस्ट फॉर लाइफ" , विन्सेंट वान गोघ , एक डच चित्रकार के जीवन पर आधारित इरविंग स्टोन द्वारा लिखित. दिल में कई भाव उमड़े उन्हें एक आर्टिकल  का स्वरुप देकर उतार डाला....
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गांधी का दंतेवाड़ा उपवास

अब हमें यह मानने में देर नहीं करनी चाहिए कि तमाम शोषण, गैर-बराबरी,आदिवासी हकों की उपेक्षाओं और अपने ही जल-जंगल-जमीन से बेदखल कर देनेवाली सरकारी नीतियों के विरोध में उपजा नक्सलवाद अब एक खूनी क्रांति कीउद्घोषणा है। क्रांति तो इसे अब भी कही जानी चाहिए
 
Gopal Singh
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नारको टेस्ट पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने नारको टेस्ट पर कानूनी प्रतिबंध लगाते हुए इसे असंवैधानिक करार दिया है. नारको टेस्ट का मामला व्यक्ति की स्वतंत्रता के हनन से जुड़ा है जिसमे उसे बोलने या चुप रहने दोनों का अधिकार दिया जाता है. एक आरोपी को अपने ऊपर लगे आरोप को कुबूल करने या न
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हाल छपा आलेख

राजस्थानी लोकगायक वर्ग लंगा और मांगनियार पर लेखन खाने कमाने के अलावा भी बहुत से काम हैं जिन्दगी में। ऐसे ही विचारों को अपनी रोजमर्रा की जिन्दगी में रपटीली राहों पर जगह देने वाले लोग, कम फीसदी ही सही लेकिन ऐसे लोगों को छोड़ दें तो, बाकी के जमाने को कला और
 
माणिक
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मुझे भी साहित्यकार बनना है.....

Shareआजकल सभी तरफ छपने छपाने का जो दौर चल पडा है,कई बार दिल इतना क्रोधित होता है कि,कुछ कर नहीं पाने पर बस सिर फोड़ने की इच्छा होती है.देशभर के लगभग सभी इलाकों में आजकल जो बात बड़ी जोर पकड़ती जा रही है,वो एक  बिमारी के माफिक ही है, साहित्यकार बनाने
 
माणिक
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समझौता

चंम्पू ने अपने पापा से पूछा कि मैने सुना है कि इंग्लैंड में शादी के कई बरस बाद तक पति-पत्नी एक दूसरे को ठीक से समझ नही पाते। पापा ने गहरी सांस लेते हुए कहा, इंग्लैंड में ही क्यूं हमारे देश में भी ऐसा ही होता है। हर शादी-शुदा व्यक्ति यह अच्छी तरह से जानता
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अंग दान - महादान

भगवान की लीला भी निराली और अपरमपार है। जो परिवार ठीक से बच्चो को पाल नही सकते उन्हे तो वो ढेरो बच्चे दे देता है और कुछ माता-पिता बेशुमार दौलत के मालिक होने के बावजूद भी एक मासूम बच्चे की किलकारी सुनने के लिए सारी उंम्र तरसते रहते है। इनसे भी अधिक बदनसीब
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औकात

एक बार महाराज अकबर को पड़ोसी राज्य से एक खास मौके के लिये न्यौता मिला। उन्होंने झट से बीरबल को बुलाकर कहा, कि इस खास मौके पर जाने के लिये एक बढ़िया सी पोशाक तैयार करवाई जाए। बीरबल ने उसी समय महाराज के शाही दर्जी को बुला भेजा। दर्जी सिलाई-कढ़ाई के लिये
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गम से न घबराना

पार्क में सैर करते हुए मिश्रा जी के एक दोस्त ने उनसे पूछ लिया कि अक्सर लोग यह कहते है कि मौहब्बत नाकाम हो जायें तो इंसान गमों में डूबने लगता है। परंतु कभी किसी ने यह नही बताया कि यदि किसी खुशनसीब की मौहब्बत कामयाब हो जायें तो क्या होता है? मिश्रा जी ने
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तोल मोल के बोल

जीवन से जुड़े अनेक पहलूओं पर गौर करे, तो हम पायेंगे कि अपने मन की बात को ठीक तरह से कहना भी एक बहुत ही महत्वपूर्ण कला है। गली मुहल्ले में बढ़-चढ़ कर बोलने वालों को यदि किसी संजीदा मुद्दे पर चंद अलफाज बोलने के लिए कह दिया जायें तो ऐसे लोगो की सिट्टी
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ऐसी की तैसी

चीकू ने अपने दादा से पूछा कि जब भी मेरे से कोई गलती हो जाती है तो आप झट से कह देते हो कि तेरी ऐसी की तैसी। आखिर यह ऐसी की तैसी होती क्या है? दादा अभी कोई अच्छा सा जवाब देने की सोच ही रहे थे कि चीकू के भाई ने उसे समझाया कि जब किसी को खुल्ले दस्त लगे हो और
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नकली का है ज़माना

कुछ दिन पहले एक विदेशी पर्यटक ने पुलिस विभाग में शिकायत दर्ज करवाई की मैने दिल्ली की एक महशूर दुकान से हाथी दांत का कुछ समान खरीदा था लेकिन जैसे ही मैने होटल पहुंच कर उसको ध्यान से देखा तो वो सारा समान नकली था। पुलिस वालो ने दुकानदार को बुला कर जैसे ही
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छोटी छोटी बाते

पंडित जी ने अपनी तोंद पर हाथ फैरने के साथ बड़ा सा डकार लेते हुए दूध का गिलास मेज पर रखते हुए मिश्रा जी से कहा कि आज बहुत दिनों बाद इतना बढ़िया और खालिस मलाई वाला दूध पीने को मिला है। जजमान सच्चे दिल से कह रहा  हूँ कि मन तृप्त हो गया। पास ही खेलते
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ईमानदारी

मिश्रा जी अपने बेटे को स्कूल का होमवर्क करवाते हुए ईमानदारी का पाठ पढ़ा रहे थे कि अचानक दरवाजे पर घंटी बजी। जैसे ही उन्होने थोड़ा सा परदा हटा कर खिड़की में से देखा तो मुहल्लें के कुछ लोग दरवाजे पर खड़े थे। मिश्रा जी को अंदाजा लगाने में देर नही लगी कि यह
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मुस्कान

स्कूल से आते ही मुस्कान अपना स्कूल बैग एक तरफ रख रोज की तरह मां के गले से लिपट गई। इससे पहले की मां उसके लिए खाना तैयार करती मुस्कान ने मम्मी से पूछा कि यह सैक्स क्या होता है? बच्ची के मुंह से यह अल्फाज सुनते ही मानों मुस्कान की मां के पैरो तले की जमीन
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आखिरी पहर

कुछ दिन पहले चुनाव अधिकारी जब मेरे पड़ोसी के घर मतदाता पहचान पत्र बनाने के लिए आये तो उन्होने घर की मालकिन से उसकी उंम्र जाननी चाही तो उसने झट से कह दिया कि 25 साल। पीछे खड़े उसके पति ने उसे डांटते हुए कहा कि यह सरकारी अधिकारी है। इन्हें बिल्कुल ठीक-ठीक
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आम आदमी

आंधी और तुफान की तरह तेज भागती जिंदगी ने आज हर किसी को एक दूसरे से आगे निकलने की होड़ ने दीवाना सा बना दिया है। चंद दिन पहले इसी जल्दबाजी के चलते एक कार वाले ने मुसद्दी लाल जी की साईकल को टक्कर मार दी। एक तो चोरी और उस पर सीनाजोरी की कहावत को चिरतार्थ
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बच्चे मन के सच्चे

दरवाजे पर अचानक जैसे ही जोर से घंटी बजी तो सभी परिवार वालों का ध्यान पूजा से भटक गया। दूसरों को सच का पाठ पढ़ाने और खुद झूठ बोलने में माहिर मिश्रा जी ने अपने बेटे को दरवाजा खोलने के साथ उसे यह आदेष भी दे डाला कि दरवाजे पर कोई भी हो कह देना कि मैं घर पर
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प्यार का तौहफा

चंद दिन पहले जब वैलेनटाईन्स डे का बुखार सारे देश में तेजी से फैल रहा था तो वो इस बार अपना कुछ असर हमारे दिल पर भी छोड़ गया। वैलनटाईन डे के साथ-साथ बिल किलंटन जो कभी अमरीका के सबसे ताकतवर नेता थे और अपने (गोरे घर) यानि वाईट हाउस मे रहते थे, उनके प्यार के
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कफ़न का दर्द

इस संसार में जीने के लिए हर इंसान को रोजी रोटी कमाने के लिए कोई न कोई काम धंधा तो करना ही पड़ता है। यह भी सच है कि व्यापारी चाहे कोई भी हो उसे हर समय अपने ग्राहको का इंतजार रहता है। चंद दिन पहले कुछ ऐसा ही नजारा शमशान घाट पर देखने को मिला। अंतिम संस्कार
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जीयें तो जीयें कैसे

आज सुबह जैसे ही मुझे मालूम हुआ कि मिश्रा जी का बेटा पास हो गया है, तो मैं भी झट से बधाई देने उनके घर जा पहुंचा। वहां पहुंचते ही मैने देखा कि उनकी बीबी अपने बेटे को बुरी तरह से पीट रही थी। मैने प्यार से उन्हें समझाते हुए कहा कि आपका बेटा इतने अच्छे अंको
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चापलूसी की महिमा

चंद दिन पहले हमारे पड़ोसी मिश्रा जी के घर इलाके के एक बहुत बड़े नेता आ पहुंचे। मिश्रा जी का सारा परिवार उनकी सेवा में जुट गया। मेहमान नवाजी की रस्म निभाते हुए मिश्रा जी ने अपने नौकर से झटपट चाय-नाश्ता तैयार करने को कहा। नेता जी ने कहा कि आजकल चाय मुझे
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जोकर तेरा जवाब नही

( मंहगाई और आकाश छूते भाव सुन कर जोकर को डर क्यूं नही लगता? )गप्पू को जैसे ही दोस्तो से मालूम हुआ कि शहर में नया सर्कस आया है, तो उसने भी अपने दादा से फरमाईश कर डाली कि मुझे भी सर्कस देखने जाना है। दादा ने उसे प्यार से समझाते हुए कहा कि सर्कस
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इंतज़ार

मुसद्दी लाल जी के बेटे की शादी जैसे ही तह हुई तो वो सबसे पहले वो अपने खानदानी दर्जी के पास पहुंचे। उन्होने दर्जी से कहा कि मेरे पिता जी ने मेरी शादी के समय एक बढ़िया सी शेरवानी तैयार करने को कहा था, लेकिन तुमने आज तक वो शादी का जोड़ा तैयार नही किया।
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साहब बहादुर

मिश्रा जी अपने छोटे बेटे की शादी के कुछ दिन बाद सुबह पार्क में जब सैर करने निकले तो उनके कुछ पुराने साथीयों में से एक ने मजाक करते हुए कहा, कि सुना है शादी के बाद आदमी साहब बहादुर बन जाता है। साहब बहादुर से आपका क्या मतलब है, मैं आपकी बात को
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कसक कलम की

मिश्रा जी की कलम से तराशी पहली चंद पुस्तकों की भारी सफलता और मुनाफे के मद्दे्नजर जैसे ही प्रकाशक महोदय को उनकी नई पुस्तक के बारे मे मालूम हुआ तो वो अपने सभी जरूरी कामों को भूलकर मिश्रा जी के घर के चक्कर लगाने लगे। किसी न किसी बहाने कभी थोड़ी बहुत मिठाई
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कहीं देर न हो जाऐं

टीचर ने गप्पू को डांटते हुए कहा कि कम से कम सैंकड़ों बार तुम्हें समझा चुका  हूँ कि स्कूल शुरू होने का समय सुबह सात बजे है। परन्तु तुम इतने ढीठ हो चुके हो कि कभी भी क्लास में आठ बजे से पहले नही आते। गप्पू ने मसखरी हंसी हंसते हुए कहा कि मैंडम आप मेरी
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बात फूलों की

एक बार कुछ हास्य कलाकार प्रोग्राम करने के लिये एक बस सें मंसूरी जा रहे थे। बस का ड्राईवर काफी तेजी और बेढ़ंगे तरीके से बस चला रहा था। बस में बैठे सभी कलाकार बार-बार कभी इधर और कभी उधर गिर रहे थे। एक कलाकार ने जोर से आवाज देकर बस ड्राईवर को कहा कि भाई बस
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भागें भी तो कब तक और कहाँ तक?

अनिश्चितता मतलब ‘कुछ भी निश्चित नहीं ‘...अपनी जड़ों से कट कर पौधा भी समय लेता है नयी ज़मीं पकड़ने में .इंसान में अपनी मिटटी से दूर हो कर भविष्य के प्रति जो अनिश्चितता पैदा हो जाती है उसका निदान हर किसी को आसानी से नहीं मिलता.खाड़ी देशों में आये प्रवासी
 
अल्पना वर्मा
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सुख़न तुम्हारे, हम ना......?

पिछले दिनों बीकानेर अपने मरहूम शायर अज़ीज़ आज़ाद की स्मृतियों में खोया-खोया सा नजर आया। अज़ीज़ आज़ाद वैसे भी याद रहने वाले इन्सान थे क्योंकि वे हमेशा शायर और अदबकारों के अलावा आम जन के बीच भी अपनी रफ़ाकत के लिए जाने जाते रहे हैं. स्मृतियाँ अक्सर खामोश होती
 
Gopal Singh
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जंगल चल कर शहर आ गए

ये जंगल के इलाके नही हैं. न ही ये किसी राज्य के पहाड़ियों के पार बसे आदिवासी हैं जो माओवाद के नाम पर घाव बन चुके हैं. यहाँ टाटा एस्सार जैसी बहुराष्ट्रीय कम्पनियों ने जमीन अधिग्रहण के लिये लोगों का विस्थापन अभियान भी नही चलाया है. सर्वजन हिताय का नारा
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हमारे अपने मुखोटे

हर शख्स यहाँ जल्दी मे है... हर दुकानदार को जल्द से जल्द सामान बेच घर जाने की जल्दी है...तो हर खरीददार को सस्ता सामान खरीद ने की...शहर के बीच इस शोर भरे बाज़ार मे हर सामान पर बोली पर बोली लग रही है... इन्ही दुकानों के बीच मुखोटों की एक दुकान...बहुत भीड़
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होती ही क्यूँ हैं अपेक्षाएँ?

[श्री प्रकाश गोविंद जी की बनाई पेंटिंग साभार]हाल ही में प्रेम दिवस पर श्री शरद कोकस जी की एक कविता पढ़ी-उसके इस एक अंश से न जाने कितने विचार मन में उठने लगे.बरसों बाद भीखत्म नहीं होती अपेक्षाएँशुभकामनाओं की तरह अल्पजीवी नहीं होती अपेक्षाएँपलती रहती हैंसमय
 
अल्पना वर्मा
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भाषा, व्यक्त्तिव और धर्म की पहचान पर विचार की आवश्यकता-हिन्दी लेख (dharma aur bhasha ki pahchan-hindi article)

हम जब हिन्दी, हिन्दू तथा हिन्दुत्व पर विचार करते हैं तो हमारा चिंतन केवल अपने देश तक ही सीमित हो जाता है। हम उस पहचान पर ही अपना ध्यान केंद्रित करते हैं जैसी हम देखना चाहते हैं, विदेशों में हमारे धर्म, भाषा तथा विचारों को कितने व्यापक संदर्भों में देखा
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वेळ आरोग्याबाबत जागरूक होण्याची

सध्या "स्वाइन फ्लू'ने खळबळ माजविली आहे. यापूर्वीही बर्ड-फ्लू, डेंगी, चिकन गुन्या अशा रोगांमुळे अशीच खळबळ माजली होती. आता परिस्थिती नियंत्रणात आणण्याचे काम सुरू आहे; परंतु अशी परिस्थिती उद्‌भवूच नये, यासाठी काय करता येईल, हे सध्याच्या पार्श्‍वभूमीवर पाहणे
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विदुर नीति-निर्दोष को सताने वाला सुख से नहीं रह सकता (nirdosh ko n sataeyn-hindu dharma sandesh)

निरर्थ कलह प्राज्ञो वर्जयन्मूढसेवितम्। कीर्ति च लभते लोके न चानर्थेन युज्यते।। हिन्दी में भावार्थ- बिना बात के कलह करना मूर्खो का कार्य है। बुद्धिमान पुरुषो को चाहिए कि वह इस बुराई से दूर रहें। बिना बात के विवाद करने से एक तो यश नहीं मिलता दूसरा अनेक
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विदुर नीति-योगासन से विद्या और ज्ञान की रक्षा संभव (yogasan se gyan ki raksha-hindu dharm sandesh)

पर्जन्यनाथाः पशवो राजानो मन्त्रिबान्धवाः।। पतयो बान्धवा स्त्रीणां ब्राह्मण वेदबान्धवा।। हिन्दी में भावार्थ- पशुओं के सहायक बादल, राजाओं के सहायक मंत्री, स्त्रियों के सहायक पति के साथ बंधु और विद्वानों का सहायक ज्ञान है। सत्येन रक्ष्यते धर्मो विद्या य
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आतंकवाद का महिमा मंडन कब तक ?

आ तंक का नंगा नाच जारी है कब कहाँ बम फट जाए कुछ नही कहा जा सकता आतंकवादी पूरे देश में खून की होली खेल रहे हैं जैसे ही कहीं बम फटता है मीडिया का पूरा लाव लश्कर वहां पहुँच जाता है उसके बाद टीवी के दर्जनों न्यूज़ चैनल दिन भर ज्यादा से ज्यादा कवरेज दिखान
 
प्रकाश गोविन्द
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ये देश है बस अवकाशों का ....

एक तरफ़ निजी क्षेत्र हैं जहाँ छुटि्टयों के लिए इन्तजार करना पड़ता है और दूसरी तरफ़ सरकारी कार्यालय हैं जो खुलने से ज्यादा बंद रहते हैं [खुलते भी हैं तो कितना काम करते हैं ] विदेशों की नक़ल कर के उन्होंने सप्ताह में दो दिन छुट्टी कर रखी है ...........
 
प्रकाश गोविन्द
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