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श्याम फिर एक बार तुम मिल जाते

श्याम, कान्हा, कृष्ण… कुछ भी कह लो उन्हे, वे जीवन के मनुष्य रुप में जन्मे विराटतम स्वरुप हैं। ऐसा प्रतीत नहीं होता कि मनुष्य रुप में जीवन इससे बड़ा हो सकता है या इससे ऊपर जा सकता है। कृष्ण जीवन का उल्लास हैं, उत्सव हैं। उन्होने सिर्फ सैधान्तिक रुप
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आज के अभिमन्यु

भाग्यशाली लगता है, आज अर्जुन पुत्र अभिमन्यु, जिसने चक्रव्यूह भेदने की कला माता के गर्भ में रहते हुए ही सीख ली थी| नहीं जानता था वह चक्रव्यूह से बाहर निकलना, पर तोड़ दुश्मन का घेरा, घुस तो गया था अन्दर, वह कपटियों के बिछाए जाल को तहस नहस करने को, मरा