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ज़माने में जंग की आग लगाकर-हिन्दी शायरी
बंदूक के सहारे ज़माने में बदलाव लाने की कोशिश हथियारों के सौदागरों के दलाल की चाल लगती है, खून बहाकर तरक्की के रास्ते चलने का ख्याल डाकुओं जैसा लगता है, दुनियां के जिंदा रहने के लिये कुछ मूर्तियों का टूटना जरूरी है शैतानों का ख्याल लगता है दरअसल जिनकी रूह
May 09 2010 04:47 PM



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