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ज़माने में जंग की आग लगाकर-हिन्दी शायरी

बंदूक के सहारे ज़माने में बदलाव लाने की कोशिश हथियारों के सौदागरों के दलाल की चाल लगती है, खून बहाकर तरक्की के रास्ते चलने का ख्याल डाकुओं जैसा लगता है, दुनियां के जिंदा रहने के लिये कुछ मूर्तियों का टूटना जरूरी है शैतानों का ख्याल लगता है दरअसल जिनकी रूह
 
दीपक भारतदीप
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हिंदी आध्यात्मिक सन्देश-बेकार के कम न करें तो ही ठीक (vidur niti-bekar kam n karen)

तथैव योगविहितं यत्तु कर्म नि सिध्यति। उपाययुक्तं मेधावी न तव्र गलपयेन्मनः।। हिंदी में भावार्थ-अच्छे और सात्विक प्रयास करने पर कोई सत्कर्म सिद्ध नहीं भी होता है तो भी बुद्धिमान पुरुष को अपने अंदर ग्लानि नहीं अनुभव करना चाहिए। मिथ्यापेतानि कर्माण
 
दीपक भारतदीप
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कबीर के दोहे-अपनी सराहना स्वयं न करें (kabir darshan-dosron ke dosh)

आपन को न सराहिये, पर निन्दिये न नहिं कोय। चढ़ना लम्बा धौहरा, ना जानै क्या होय।। संत शिरोमणि कबीरदास जी कहते हैं कि अपने मूंह से कभी आत्मप्रवंचना और दूसरे की निंदा न करें। क्योंकि कभी आचरण की ऊंचाई पर हमारे व्यकितत्व और कृतित्व को नापा गया तो तो पता नहीं
 
दीपक भारतदीप
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कबीर वाणी-प्यार को सही ढंग से कोई नहीं समझता(kabir vani-pyar ka gyan)

प्रेम-प्रेम सब कोइ कहैं, प्रेम न चीन्है कोय जा मारग साहिब मिलै, प्रेम कहावै सोय संत शिरोमणि कबीरदास जी कहते हैं कि प्रेम करने की बात तो सभी करते हैं पर उसके वास्तविक रूप को कोई समझ नहीं पाता। प्रेम का सच्चा मार्ग तो वही है जहां परमात्मा की भक्ति और ज्ञान
 
दीपक भारतदीप
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मनु स्मृति-अध्ययन में सुस्ती नहीं करें (manu smriti-shiksha aur susti)

अध्येयष्यमाणं तु गुरुर्नित्यकालमतन्द्रितः। ‘अधीष्व भो! इति ब्रुयाद्विरामोऽस्त्विति चारमेत्।। हिंदी में भावार्थ-शिष्य को पढ़ाने के विषय में गुरु को कभी भी आलस नहीं बरतना चाहिये। इसके अलावा बेमन से भी अध्यापन का कार्य करना उचित नहीं है। अध्यापन प्रारंभ करने
 
दीपक भारतदीप
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भर्तृहरि शतक-मनुष्य के लिए में स्वाभिमान जरूरी (jivan men svabhiman jaroori-hindi sandesh

लांगल चालनमधश्चरणावपातं भू मौ निपत्य बदनोदर दर्शनं च। श्चा पिण्डदस्य कुरुते गजपुंगवस्तु धीरं विलोकपति चाटुशतैश्चय भुंवते।। हिंदी में भावार्थ-श्वान भोजने देने वाले के आगे पूंछ हिलाते हुए पैरों में गिरकर पेट मूंह और पेट दिखाते हुए अपनी दीनता का प्रदर्शन
 
दीपक भारतदीप