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घर का रोना-हास्य व्यंग्य कविता (ghar ka rona-vyangya kavita

छायागृह में चलचित्र के एक दृश्य में नायक घायल हो गया तो एक महिला दर्शक रोने लगी। तब पास में बैठी दूसरी महिला बोली ‘अरे, घर पर रोना होता है इसलिये मनोरंजन के लिये यहां हम आते हैं पता नहीं तुम जैसे लोग घर का रोना यहां क्यों लाते हैं अब बताओ क्या सास ने
 
दीपक भारतदीप