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'अग्नि देवता' -यादवचंद्र के प्रबंध काव्य "परंपरा और विद्रोह" का चतुर्थ सर्ग

अनवरत के पिछले अंकों में आप यादवचंद्र जी के प्रबंध काव्य "परंपरा और विद्रोह" के तीन सर्ग पढ़ चुके हैं। इन कड़ियों को ऊपर दिए गए लिंक पर क्लिक कर के पढ़ा जा सकता है। इस काव्य का प्रत्येक सर्ग एक पृथक युग का प्रतिनिधित्व करता है। युग परिवर्तन के साथ ही
 
दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi