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मैं स्वतंत्र हूँ

ऋषभ कुमार मिश्र 'निशीथ' पिछले महीने से हिन्द-युग्म पर सक्रिय हैं। इनकी एक कविता पिछले महीने प्रकाशित हुई थी। अप्रैल माह की यूनिकवि प्रतियोगिता में भी इनकी एक कविता ने 12वाँ स्थान बनाया है।कविताः तुम्हें क्यातुम्हें क्या!कुटिल मुस्कान और कुछ नशीली
 
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ग्रहण का सच

अप्रैल 2010 की यूनिकवि प्रतियोगिता की शीर्ष 10 कविताओं से आगे बढ़ते हैं। 11वीं सुमीता प्रवीण केशवा की है। सुमीता इससे पहले भी हिन्द-युग्म पर प्रकाशित हो चुकी हैं।कविताः यह ग्रहण नहीं, है पाणिग्रहणहाँ, चाँद हूँ मैं...जैसे चन्द्रमुखी थी एकऔर हे सूर्यदेव,
 
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हर रस्ते की एक कहानी लगती है

स्वप्निल तिवारी 'आतिश' हिन्द-युग्म पर अत्यंत सक्रिय हैं। ग़ज़लें लिखते हैं। अब तक इनकी 3 कविताएँ प्रकाशित है। आज हम जो कविता प्रकाशित करने जा रहे हैं, उसने अप्रैल 2010 की यूनिकवि प्रतियोगिता में 10वाँ स्थान बनाया है।पुरस्कृत कविताः सीधी सादी एक कहानी
 
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खचाखच भर चुकी होगी पृथ्वी

अप्रैल माह की यूनिकवि प्रतियोगिता की नौवीं कविता के रचनाकार बीकानेर (राज॰) निवासी राजेन्द्र स्वर्णकार काव्य की सभी विधाओं, रंगों-रसों में राजस्थानी, हिंदी और उर्दू में ( ब्रज, भोजपुरी और अंग्रेजी में भी ) मुख्यतः छंदबद्ध के सृजनकर्म में समलग्न हैं। लगभग
 
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चिड़िया भूखी थी भूखी है पौ-बारह सरपंचों की

अवनीश सिंह चौहान हिन्द-युग्म की प्रतियोगिता में पहली बार भाग ले रहे है और इनकी कविता ने आठवाँ स्थान बनाया है। 4 जून 1979 को जन्मे अवनीश की कविताएँ, कहानियाँ, आलेख, समीक्षाएँ इत्यादि अमर-उजाला, हिंदुस्तान, देश-धर्म, डी एल ए, उत्तर-केसरी, प्रेस-मेन,
 
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बादल खोल के मेरी आरजुएँ देखना तुम

अप्रैल माह की यूनिकवि प्रतियोगिता की सातवीं कविता ऋतु सरोहा द्वारा रचित है। ऋतु की कविताएँ इससे पहले दो और बार इस प्रतियोगिता के शीर्ष 10 में स्थान बना चुकी हैं। पुरस्कृत कविताः अजनबीतुम्हें याद है ना मेरी आरज़ुओं को आदत थीतुम्हारे फलक के रंगीन सितारे
 
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माँ ने बना लिया है ब्लॉग, पैदा कर लिए हैं ईमेल-पते

संगीता सेठी के कविता के पात्र सामान्तयाः स्त्रियाँ ही होती हैं। इनकी कविताएँ हमारे निर्णायकों को भी पसंद आती हैं। इन सभी बातों का ताज़ा उदाहरण अप्रैल माह में छठवाँ स्थान बना चुकी इनकी यह कविता है-पुरस्कृत कविताः नहीं बाँच सकती कोई माँवो ज़माना चिट्ठी
 
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आज तुम लटके मिले हो फाँसी पर

युवा कवि दीपक मशाल अपनी लेखनी को लगातार परिपक्व करते जा रहे हैं। सितम्बर 2009 का यूनिकवि सम्मान प्राप्त कर चुके दीपक की एक कविता ने अप्रैल 2010 की यूनिकवि प्रतियोगिता में चौथा स्थान बनाया है।पुरस्कृत कविताः बीजऔर आज तुम लटके मिले हो फाँसी परमगर फिर भी
 
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गायब हो जाता है

हिन्द-युग्म के अप्रैल 2010 की यूनिकवि प्रतियोगिता के तीसरे स्थान की कविता की कवयित्री नीरा त्यागी ने पहली बार इस प्रतियोगिता में भाग लिया है। नई दिल्ली में जन्मीं नीरा मिरांडा हाऊस, दिल्ली यूनिवर्सिटी से विज्ञान में स्नातक हैं। ब्रिटेन के सरकारी
 
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कोखजने का दम तोड़ना

एम वर्मा कई बार हिन्द-युग्म की प्रतियोगिता में भाग ले चुके हैं और लगभग हर बार ही इनकी कविताओं ने शीर्ष 10 में स्थान बनाया है। जनवरी 2010 के यूनिकवि सम्मान से सम्मानित हैं। अप्रैल 2010 की यूनिकवि प्रतियोगिता में इनकी कविता ने दूसरा स्थान बनाया है।पुरस्कृत
 
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मुंगेर मेल से हिन्द-युग्म पहुँचा अप्रैल 2010 का यूनिकवि

हमें बहुत खेद है कि हम अप्रैल 2010 की यूनिकवि एवं यूनिपाठक प्रतियोगिता के परिणाम अभी तक नहीं प्रकाशित कर पाये। असल में निर्णायकों ने जिस कविता को यूनिकवि चुना, उस कवि ने अपनी कविता को मुंगेर (बिहार) से स्कैन करके भेजा था और कविता के साथ अपना कोई फोन/मो॰
 
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