मेरी बारे में
मैं जो भी करता हूं, वह मुझसे निकलता है; लेकिन मेरा होना मेरे करने से नहीं निकलता। मेरा अस्तित्व मेरे करने के पहले है। आचरण बाहरी घटना है, इसलिये यह भी हो सकता है कि मेरा कर्म मेरे संबंध में जो भी कहता हो, वह मेरी आत्मा की सही गवाही न हो। कर्म धोखा दे
Mar 25 2010 12:47 PM



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