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ले डूबा भ्रष्टाचार

और फिर एक और संस्था मलबे में तब्दील हो गई...संस्था से मतलब इंस्टीट्यूट से नहीं बल्कि इंस्टीट्यूशन से...इंस्टीट्यूशन, जिसे बनने और बनाने में लंबा ऐतिहासिक सफर तय करना पड़ता है...और फिर उसका यूं बिखर जाना...बेहद दुखद.हम बात कर रहे हैं एमसीआई, मेडिकल
 
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पत्नियों के साथ रात बिताने का हक...

पाकिस्तान...जिसका नाम आते ही जेहन में बेहद दकियानुसी और फिल्मों एवं मीडिया की बदौलत बनी एक स्टीरियोटाइप तस्वीर सामने आने लगती है...लेकिन इसबार कुछ अलग और दिलचस्प मामला है...माजरा ऐसा कि सुनकर यकायक यकीन नहीं होगा कि यह ख़बर पाकिस्तान से आई है...जी हां,
 
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भाषा पर बवेला क्यों...

आलोक सिंह साहिलमीडिया की भाषा...आज की तारीख में, मीडिया से जुड़ी हर दूसरी बहस का मुद्दा सिर्फ यही है...मीडिया से आशय टीवी चैनलों की भाषा से है...अमूमन हर रोज कहीं न कहीं किसी अखबार, पत्रिका या नेट पर किसी कोने में मीडिया की भाषा पर पढ़ने को मिल जाता
 
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