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प्रेम, अंहकार और टॉनिक

हजारों की भीड़ में भी दूसरे हैं इस कारण अपने होने का अहसास तो रहता है परन्तु तब भी वजूद के होने की बात गहरे में नहीं पनप पाती| यह तो तभी पता चलता है जब हजारों की भीड़ में से कोई एक आकर हाथ थाम लेता है| पहली बार कोई हमारे अपने कारण पास [...]
 
स्वार्थ
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प्रेम और अंहकार

समय रहते एक बार तो जवाब दे दो मेरी पुकार का| बाद में ऐसा ना हो समय उलझा ले अपनी व्यस्तता के जाल में मुझे| और विवश मै चाहकर भी तुम्हारी आवाज ही न सुन पाँऊ |