पसंद करें
0
नापसंद करें

संत कबीर के दोहे-धामिक व्यक्ति दूसरे जीवों का कल्याण कर अपना धर्म प्रमाणित करता है (Dhamik vyakti ki pahachan-kabir ke dohe)

फलं कतकवृक्षस्य यद्यप्यम्बुप्रसादकम्।न नामग्रहणादेव तस्य वारि प्रसीदति।।हिन्दी में भावार्थ-निर्मली का वृक्ष जल को शुद्ध करता है भले ही उसकी जानकारी सभी को नहीं है। उसका नाम लेने से जल शुद्ध नहीं होता बल्कि वह स्वयं उपस्थित होकर जल शुद्ध करता है। उसी
टैग: adhaytma
पसंद करें
0
नापसंद करें

रहीम संदेश-स्वार्थ के अनुसार लोगों का दृष्टिकोण बदलता है (svarth aur drishtikon-rahim sandesh)

स्वारथ रचत रहीम सब, औगुनहूं जग मांहिबड़े बड़े बैठे लखौ, पथ रथ कूबर छांहि।।कविवर रहीम कहते हैं कि लोग अपने स्वार्थ के अनुसार दूसरे में गुण और अवगुण ढूंढते रहते हैं। जो कभी अपना स्वार्थ साधने के लिये रथ के हरसो की टेढ़ी मेढ़ी छाया को अशुभ कहते हैं वह लोग उसकी
टैग: adhaytma
पसंद करें
0
नापसंद करें

मनु स्मृति-धर्म धारण करना है, दिखाना नहीं (manu smriti in hindi -religion and men)

दुषितोऽपि चरेद्धर्म यत्रतत्राश्रमे रतः।समः सर्वेषु भूतेशु न लिंगे धर्मकारणम्।।हिन्दी में भावार्थ- चाहे घर में हो या आश्रम में शास्त्रों के ज्ञाता को चाहिए कि सामान्य प्राणियों के दोषों से ग्रसित होने पर भी सभी को समान दृष्टि से देखे। वह धर्म का अनुसरण
टैग: adhaytma