कितना कुछ छिपाती रहती हैं लड़कियाँ आत्महत्या के एक दिन पहले तक
विजयशंकर चतुर्वेदी यथार्थ के कवि हैं। वे समय के आर और पार देखने वाली कविताएँ लिखते हैं। 'पृथ्वी के लिए तो रुको' कविता-संग्रह की बहुत सी कविताओं में विजय वास्तविकता के शब्दनाव खेते हैं। देखिए कुछ और नज़ीर-बड़े बली रहे वेवे जब तक रहेवायु, पृथ्वी, जल,
Jun 05 2010 02:43 PM



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