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ज्ञान से नहीं, अज्ञान से हुई धर्म की उत्पत्ति

धर्म का धंधा: भाग - 2धर्म की उत्पत्ति - विनोद विप्लवमानव समाज के आविर्भाव के सबसे प्रारंभिक काल में आदि मनुष्यों के बीच धर्म उसके यथावत अर्थों में विद्यमान नहीं था। आदिकालीन पाषाण युग के अन्न संग्रह करने वाले शिकारियों में देवी-देवताओं, आराधनाओं और
 
विप्लव
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भराणा मेला कुमारसेन

भराणा मेला कुमारसेन में  धूमधाम से मनाया गया!  स्थानिय अवकाश होने के कारण मेलें में आस पास के गावों के लोगों ने शिरकत की ! भराणा मेला के साथ ही इस जनपद में मेलों की शुरुआत हो जाती है! इसके बाद नारकन्डा का हाटु मेला और तानुजुबड़ का मेला आता है
 
रौशन जसवाल विक्षिप्त
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उदयगिरी (विदिशा)

अपनी कार से एक रविवार परिवार सहित निकल पड़े थे, विदिशा के करीब उदयगिरी के लिए. दूरी लगभग ६० किलोमीटर. नाश्ता आदि से निपट कर निकलना हुआ था और चूंकि पूरा परिवार था, विलम्ब तो होना अवश्यम्भावी था. भरी दुपहरी में पहुंचना हुआ. विदिशा तो जाने की आवश्यकता नहीं
 
पा.ना. सुब्रमणियन
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चिठ्ठा प्रवचन महामूर्खराज की जुबानी

आओ आओ भाई लोगो बाबा महामूर्खराज के चिठ्ठा सत्संग सभा मे आप लोगों का हार्दिक स्वागत है । आज बाबा मूर्खराज ओह क्षमा कीजिएगा बाबा महामूर्खराज आप लोगो को मूर्खतापूर्ण पर रहस्यों से भीगे हुए प्रवचन देंगे आप लोगो से नम्र निवेदन है की कृपया शांति बनाए रखेगें
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विदुर नीति-बुद्धिमान को सहारा देते हैं संत (buddhiman aur sant-hindu adhyatmik sandesh)

गतिरात्मवतां सन्तः सन्त एवं सतां गतिः। असतां च गतिः सन्तो न त्वसन्तः सतां गतिः।। हिंदी में भावार्थ- मतिमान और गतिमान पुरुषों को सहारा देने वाले संत हैं। संतों को भी सहारा देने वाले संत हैं। असत्य पुरुषों को भी संत सहारा देते हैं पर दुष्ट लोग किसी को
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चाणक्य नीति-दुष्ट से निपटने के लिये खड्ग हाथ में लेना ही पड़ता है (chankya niti in hindi)

तुष्यन्ति भोजने विप्रा मयूरा धनगर्जिते। साधवः परसम्पतिौ खलः परविपत्तिषुः।। हिंदी में भावार्थ- विद्वान अच्छा भोजन, मेघों की गर्जना से मोर तथा साधु लोग दूसरों की संपत्ति देखकर प्रसन्न होते हैं वैसे ही दुष्ट लोग दूसरों को संकट में फंसा देखकर हंसते हैं।
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कौटिल्य का अर्थशास्त्र-मित्र की भी होती हैं तीन श्रेणियां (kautilya ka arthshastra in hindi)

मित्राणामन्तरं विद्याण्मध्यज्यायः कनीयसाम्। मध्यज्यायः कनीयांसि कर्मणि च पृथकपृथक्।। हिंदी में भावार्थ- मित्रों की उच्च, मध्य और निम्न कोटि की पहचान करते हुए उनके पृथक पृथक कार्यों का अध्ययन करें। प्रकाशपक्षग्रहणं न कुर्यात्सुहृदां स्वयम्। अन्योन्यमत
 
दीपक भारतदीप
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कहानियां हमारे आस पास ही तो है

कहानियां हमारे आस पास ही तो होती है ! स्वार्थ में आदमी अक्सर अँधा हो जाता है ! अपने स्वार्थ के वो कुछ भी कर बेठता है ! यूँ तो टी वी पर चलने वाले धारावाहिक सास बहु के किस्सों पर ही होते है इन धारावाहिकों में मेरी कोई रूचि भी नहीं है ! तभी तो रिमोट पर
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