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তেভাগার আন্দোলনে মেয়েদের ভূমিকা

- লিখেছেন অন্বেষা ভট্টাচার্য “তেভাগা” শব্দটি উচ্চারিত হলেই খুব ছোট থেকে আমার মনে যে নামটি ঝিলিক দেয় তা হলো “অহল্যা”। না উনি ইলা মিত্র বা মণিকুন্তলা সেনের মত বড়ো নেত্রী নন। সাধারণ কৃষক বধূ। হ্যাঁ, তেভাগা আন্দোলনে এই কৃষক ঘরের
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कामथ सोनियाजी को दे सीख

कामथ सोनियाजी को दे सीख गोआ के मुख्यमंत्री श्री कामथ द्वारा राजनीति में महिलाओं के नही आने का कथन अत्यतं आपत्तिजनक है। महिलाऐं राजनीति में आने पर पागल हो जाएगी, कामथ का यह कहना मानवीय सभ्यता पर एक कलंक है। यह राष्ट्र का अपमान है। कामथ राजनीति में महिलाओं
 
Kiran Maheshwari
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एक चपरासी की भी मेडिकल जाँच होती है नौकरी पाने के लिए

मेरे इस पोस्ट का मन्तव्य किसी वर्गीकरण से नहीं है , चपरासी शब्द  केवल उदाहरण के लिए प्रयुक्त हैइस देश में हर चीज पर कुछ न कुछ प्रतिबंध या आवश्यक योग्यता निर्धारित है .विवाह की कानूनी सीमा , उम्र के हिसाब से.स्कूल/कॉलेज  में न्यूनतम और अधिकतम
 
डॉ महेश सिन्हा
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झारखंड में बीपीएल पोलिटिक्स पोलिटिक्स...

अगर एक पाठक या नागरिक के तौर पर आप हमसे झारखंड की राजनीति के बारे में पूछियेगा, तो हाथ जोड़ दूंगा। भैया बिहार की राजनीति तो समझ में आती है, लेकिन यहां झारखंड में बीपीएल पोलिटिक्स यानी बिन पेंदी का लोटा पोलिटिक्स को देखकर मन हाय-हाय करता है। क्षण में पलटी
 
prabhat gopal
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टेलीवीजन (या रेडियो) की जरूरत

लम्बे समय से मैने टेलीवीजन देखना बन्द कर रखा है। मैं फिल्म या सीरियल की कमी महसूस नहीं करता। पर कुछ दिन पहले सवेरे जब मैं अपनी मालगाड़ियों की पोजीशन ले रहा था तो मुझे बताया गया कि दादरी के पास लोग ट्रैक पर आ गये हैं और दोनो ओर से ट्रेन यातायात ठप है।
 
ज्ञानदत्त पाण्डेय Gyandutt Pandey
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प्रधान, पोखरा, ग्रीस और पुर्तगाल

मैं पिछले महीने में प्रधान जी से कई बार बात करने का यत्न कर चुका। हर बार पता चलता है कि पोखरा (तालाब) खुदा रहे हैं। लगता है नरेगा की स्कीम उनका बहुत समय ले ले रही है। सरकार बहुत खर्च कर रही है। पैसा कहीं से आ रहा होगा। हर वैसी स्कीम जो कम [...]
 
Gyandutt Pandey
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प्रधान, पोखरा, ग्रीस और पुर्तगाल

मैं पिछले महीने में प्रधान जी से कई बार बात करने का यत्न कर चुका। हर बार पता चलता है कि पोखरा (तालाब) खुदा रहे हैं। लगता है नरेगा की स्कीम उनका बहुत समय ले ले रही है। सरकार बहुत खर्च कर रही है। पैसा कहीं से आ रहा होगा। हर वैसी स्कीम जो कम से कम लागत
 
ज्ञानदत्त पाण्डेय Gyandutt Pandey
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लालू प्रसाद का जापान विस्तार

एक बार लालू प्रसाद यादव बिहार में व्यापार विस्तार के सिलसिले में एक जापानी प्रतिनिधि मंडल को सम्बोधित कर रहे थे ! जापानी प्रतिनिधि मंडल बिहार के प्रगति से बहुत ही प्रभावित हुए और कहा बिहार बहुत ही अच्छा राज्य है ! आप हमें ३ महीने दीजिये हम बिहार को ज
 
Ashvin Bhatt
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भइया लोगों के लिए कुछ सबक

आजकल महाराष्ट्र में 'महाराष्ट्रियता' के नाम पर जो भी हो रहा है - या हुआ है उसकी जितनी भर्त्सना की जाए कम है। खैर, इस मामले में बहुत कुछ कहा और लिखा जा रहा है मीडिया में - सो मैं और कुछ गढ़ना नही चाहता। इसके पीछे की सच्चाई तो यह है। वैसे "डेमोक्रेजी"
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नारायण दत्त तिवारी का इस्तीफा

यह नाराण दत्त तिवारी का मामला मेरी समझ के परे है। ताजा समाचार के अनुसार, उन्होंने अपना त्यागपत्र दे दिया है। ८६ की आयु में क्या कोई मर्द ऐसी मर्दानगी का प्रदर्शन कर सकता है? एक नहीं, दो नहीं बल्कि तीन तीन महिलाओं के साथ बिस्तर पर लेटे लेटे रति-क्रीडा
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स्मार्ट और धूर्त बधिक

अंगुलिमाल को बुद्ध चाहिये थे, पश्चाताप के लिये। मुझे नहीं लगता कि जस्टिस तहिलियानी के कोर्ट में बुद्धत्व का वातावरण रहा होगा। खबरों के अनुसार तो वे स्वयं अचकचा गये थे इस कंफेशन से। अपना अजमल कसाब कसाई तो बहुत स्मार्ट निकला जी। उसे इतनी देर बाद ख्याल
 
ज्ञानदत्त पाण्डेय | Gyandutt Pandey
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कौन चाहता है इलेक्टॉनिफिकेशन ?

इन्जीनियरिंग की अस्सी प्रतिशत पढ़ाई मैने स्लाइडरूल और लॉगरिथ्मिक टेबल की सहायता से की गई गणना से पार की थी। पढ़ाई के चौथे और पांचवें साल में कैल्क्युलेटर नजर आने लगे थे। जब मैने नौकरी करना प्रारम्भ किया था, तब इलेक्टॉनिक टाइपराइटर भी इक्का-दुक्का ही आ
 
ज्ञानदत्त पाण्डेय | Gyandutt Pandey
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क्यों न रोएँ ?

शीर्षक पढ़ते ही आपने मुझे निराशावादी मान लिया होगा। किसी तरह कलेजा मजबूत करके मैं कह सकता हूँ कि मैं निराशावादी नहीं ,आशावादी हूँ। पर मेरे या आपके ऐसा कह देने से इस प्रश्न का अस्तित्व समाप्त नहीं हो जाता। सच तो यह है कि आशावाद के झूठे सहारे हम अपने जी
 
Hari Shanker Rarhi
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nijikaran

गतांक से आगे दूसरा महत्त्वपूर्ण निजीकरण शिक्षा का हुआ। सरकारी स्कूलों में कथित रूप से घोर भ्रष्टाचार फैला हुआ था। यद्यपि परिणाम प्रतिशत फेल विद्यार्थियों का ही अधिक होता ,फिर भी कुछ तो उत्तीर्ण हो ही जाते।यही उत्तीर्ण छात्र आगे चलकर बेरोजगारों की संख
 
हरिशंकर राढ़ी
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सब कुछ है गांधीमय (रिंग, रिंग रिंगा भाग तीन)

मैं आजादी के बाद की बात कर रहा हूं। उससे पहले भले ही गांधीजी का जीवंत करिश्‍मा रहा होगा लेकिन इसके बाद कैश कराने की प्रवृत्ति के चलते सबकुछ गांधीमय हो चुका है। गांधी टोपी पहनी तो इसलिए कि गांधीजी ने कहा है और उतारकर रख दी तो इसलिए कि गांधीजी खुद नंगे
 
सिद्धार्थ जोशी Sidharth Joshi
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क्यों नहीं समझते इतनी सी बात?

लालगढ़ में माओवादियों को घेरने का क़रीब-क़रीब पूरा इंतज़ाम कर लिया गया है. मुमकिन है कि जल्दी ही उनसे निपट लिया जाए और फिलहाल वहां यह समस्या हल कर लिए गए होने की ख़बर भी आ जाए. लेकिन क्या केवल इतने से ही यह समस्या हल हो जाएगी? लालगढ़ में माओवादियों ने प्रश
 
इष्ट देव सांकृत्यायन
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अमेरिकन मॉडल से विकास के मायने

पिछली पर्यावरण वाली पोस्ट - " सादा जीवन और गर्म होती धरती " में मैने आशंका जताई थी कि अमरीकी स्तर का विकास और मध्य वर्ग में उपभोक्ता बनने की ललक पर्यावरण की समस्यायें पैदा कर देगी। यह कहना, अमेरिकन मानस को गैर जिम्मेदार बताना नहीं था। यह के
 
ज्ञानदत्त पाण्डेय | Gyandutt Pandey
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माक्यावैली के प्रसिद्ध कथन, ” द प्रिन्स ” से

निकोलो माक्यावैली द्वारा, इतालवी भाषा में, लिखित ” द प्रिन्स ” की चर्चा जारी रखते है | पिछले पोस्ट में ” द प्रिन्स ” में निहित माक्यावैली के, विभिन्न विषयों पर, विचारों का सारांश प्रस्तुत है | पिछले पोस्ट को पढ़ने के
 
mequitnever
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चुनाव यात्रा और नत्तू पांडे

भारत में चुनाव सम्पन्न हुये। मेरे दो स्वप्न पूरे हुये। पहला था कि कोई दल २०० से ऊपर सीटें ले पाये जिससे सतत ब्लैकमेलर्स का भय न रहे या कम हो। वह कांग्रेस पार्टी की अप्रत्याशित जीत ने पूरा कर दिया। सारे एग्जिटपोलिये अपने जख्म चाट रहे होंगे पर कोई खुले
 
ज्ञानदत्त पाण्डेय | Gyandutt Pandey
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परचे बाँटने वालों की तरह अब ’हिन्दुस्तान’ भी बैक-फ़ुट पर ?

मौजूदा आम चुनाव में पूर्वी उत्तर प्रदेश के प्रमुख दैनिक ’हिन्दुस्तान’ तथा ’दैनिक जागरण’ द्वारा चुनाव रिपोर्टिंग के प्रेस परिषद द्वारा जारी दिशा निर्देशों की खुले आम धज्जियाँ उड़ाने के बारे में मैंने ४ अप्रैल , २००९ को लिखा था । प्रेस परिषद की शिकायत प
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अप्रवासी भारतियों का मतदान अधिकार

मूल लेखक/लेखिकारिज़वान · अनुवादक Debashish Chakrabarty · मूल प्रविष्टि देखें लॉ एंड अदर थिंग्स चिट्ठे ने विदेशों में काम कर रहे या पढ़ रहे भारतियों को मतदान का अधिकार देने के कानूनी पक्ष की चर्चा करते हुये लिखा है, “इन्हें मतदान का अधि
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रंगों की होली वाकई बेमानी है

देश दुखी है । देश चलाने वाले दुखी हैं। मुंबई हमलों पर देश को न्याय दिलाने के बदले देश दुखी है। लोग इतने दुखी हैं कि होली का रंग उन्हे खून के रंग से ज्यादा खतरनाक लग रहा है। 26/11 का दर्द इस हद तक है कि हमलावर कौन थे...कहां से आये थे सब मालूम होने के
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राहुल, मनमोहन या आडवाणी: युवा कौन?

पिछले कुछ हफ्तों से अखबारो और समचार चैनलों से जाना कि राहुल गाँधी आने वाले चुनावों के लिये युवाओं की फौज तैयार कर रहे हैं। यानि कि कांग्रेस चाहती है कि युवा इस देश का नेतृत्व करें। मनमोहन सिंह तो वैसे भी पहले से ही कांग्रेस के लिए कठपुतली रहे हैं। यद
 
निखिल आनन्द गिरि
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