पसंद करें
1
नापसंद करें

वह आये घर में हमारे, ख़ुदा की क़ुदरत है !

है ग़ैब ग़ैब जिसको समझते हैं हम शुहूद,हैं ख़्वाब में हनोज़, जो जागे हैं ख़्वाब में ।शुहूद वह अवस्था होती है जब साधक को सभी वस्तुओं में ईश्वर ही ईश्वर दिखाई पड़ता है । ग़ैब ग़ैब का मतलब गैबुलग़ैब या परोक्ष का परोक्ष है । कहते हैं, जिसे हम सर्वत्र उपस्थित
 
अनिल कान्त :
टैग: Mirza Ghalib
पसंद करें
0
नापसंद करें

ग़ालिब तृप्ति के नहीं, तृष्णा के कवि

जब ग़ालिब युवा थे तब उनके उस्ताद ने उनसे कहा था, "शकर का मज़ा चख लेना मगर मक्खी बनकर शहद पर कभी न बैठना, नहीं तो उड़ने की शक्ति बाकी नहीं रहेगी ।" यह बात ग़ालिब के ह्रदय में पैठ कर गयी । यही उनके जीवन की रीड की हड्डी है । उन्होंने एक ही जगह बैठकर पीना, एक
 
अनिल कान्त :
टैग: Mirza Ghalib
पसंद करें
2
नापसंद करें

आपसे बढ़कर भी बला है ! (ग़ालिब)

एक बार की बात है कि जिस मकान में ग़ालिब रहते थे , उसमें कई सारी समस्याएं थीं इसीलिए तकलीफ़ थी । वे इसीलिए मकान बदलना चाहते थे । एक दिन वे खुद एक मकान देखकर आये । उसका बैठकखाना तो पसंद आ गया पर जल्दी में अन्तःपुरवाला हिस्सा न देख सके । फिर उन्होंने यह भी
 
अनिल कान्त :
टैग: Mirza Ghalib
पसंद करें
3
नापसंद करें

ग़ालिब और उनकी बीवी उमराव का सम्बन्ध

1799 में दिल्ली के एक प्रतिष्ठित घराने में उमराव का जन्म हुआ था जो बाद में ग़ालिब की धर्मपत्नी बनीं । उमराव के पिता नवाब इलाहीबख्श का जीवन वैभव एवं सुख शान्ति से परिपूर्ण था । वह 'शहज़ादए-गुलफ़ाम' के नाम से प्रसिद्द थे । इससे कल्पना की जा सकती है कि उमराव
 
अनिल कान्त :
टैग: Mirza Ghalib
पसंद करें
3
नापसंद करें

ग़ालिब को दूसरी औरत का आकर्षण

जब इंसान को घर में प्रेम प्राप्त न हो, दिल की छाया प्राप्त न हो, जब खुद की पत्नी जीवन के आशीर्वाद की जगह जीवन का बोझ बन जाए, उसके मुख से प्रेम और मृदुलता के आश्वासन के स्थान पर कटु वाणी के वाँ झरने लगें तब पुरुष घर से बाहर भागता है । ग़ालिब पर तो बचपन
 
अनिल कान्त :
टैग: Mirza Ghalib
पसंद करें
5
नापसंद करें

ग़ालिब : कुछ दिलचस्प किस्से

जाड़े का मौसम था । तोते का पिंजरा सामने रखा था । सर्द हवा चल रही थी । तोता सर्दी के कारण परों में मुँह छिपाए बैठा था । मिर्ज़ा ने देखा और उनकी अन्दर की जलन बाहर निकली । बोले- "मियाँ मिट्ठू! न तुम्हारे जोरू, न बच्चे । तुम किस फ़िक्र में यों सर झुकाए बै
 
अनिल कान्त :
टैग: Mirza Ghalib