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मेरे जेब में पड़े चंद सिक्को की खनखनाहट कुछ कहती हैं!

मेरे जेब में पड़े चंद सिक्को की खनखनाहट कुछ कहती हैं पैदल चलने के दरमाया निरंतर गिरते पैसो के मूल्य के दौर में खुशी की वह गीत जिसे अर्जित करने में जलाया दिन-भर शरीर का खून जिससे मिलेगा आज शाम और कल सुबह का नून - भात “मुझे और सिर्फ मुझे,” रात के सोने
 
"Azad Sikander"
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काश कभी ये हो जाये

काश कभी ये हो जाये काश कभी ये हो जाये, मेरी धड़कने दूर बैठे, परदेश मे भी वैसे सुनाई दे, जैसे मेरे बगल में बैठा हो, काश कभी ये हो जाये कि, तेरी खुशी मेरे अरमानों के साथ जुड़ जाये, जैसे शरीर से आत्मा जुड़ां है. काश कभी ये हो जाये , तेरी याद आये, और तू, नज
 
"Azad Sikander"
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