मेरे जेब में पड़े चंद सिक्को की खनखनाहट कुछ कहती हैं!
मेरे जेब में पड़े चंद सिक्को की खनखनाहट कुछ कहती हैं पैदल चलने के दरमाया निरंतर गिरते पैसो के मूल्य के दौर में खुशी की वह गीत जिसे अर्जित करने में जलाया दिन-भर शरीर का खून जिससे मिलेगा आज शाम और कल सुबह का नून - भात “मुझे और सिर्फ मुझे,” रात के सोने
Dec 14 2009 12:38 AM



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