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प्रेम, अंहकार और टॉनिक

हजारों की भीड़ में भी दूसरे हैं इस कारण अपने होने का अहसास तो रहता है परन्तु तब भी वजूद के होने की बात गहरे में नहीं पनप पाती| यह तो तभी पता चलता है जब हजारों की भीड़ में से कोई एक आकर हाथ थाम लेता है| पहली बार कोई हमारे अपने कारण पास [...]
 
स्वार्थ
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लव, सेक्स, धोखा और भारतीय समाज : एक नजरिया

समाज में आजकल जो मुद्दा सबसे ज्यादा गर्म है वह है लव, सेक्स और उसके बाद धोखा. संस्कृति के नाम पर प्यार को बदनाम करने का क्रम जारी है. कुछ समाजशास्त्री प्यार, शारीरिक सबंध आदि को गलत मानते हैं तो कुछ इसे सही. इस हो-हल्ले में शायद कुछ अनदेखा रह गया. काफी
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राज़ की बातें लिखी और खत खुला रहने दिया

किशोरावस्था से जवानी की ओर जाती तुम्हारे बचपने का यह उच्चतम स्तर होगा. अब तुम थोड़ी गंभीर हो जाओगी. अल्हड़ता दूर जाने लगी होगी. होंटों पर लिपस्टिक लगाकर आईने में देर तक नहीं हँसती होगी अब करीने से तुम्हें लिपस्टिक लगाना भी आ गया होगा. तुमने अब दुपट्टा
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मुझे कुछ नहीं होगा… आइ लव यू रज्‍जन जी…

नीतीश की चापलूसी [12 May 2010 | Read Comments | ] प्रभात खबर ♦ मौर्य साम्राज्‍य के संस्थापक सम्राट चंद्रगुप्‍त रात में वेश बदल कर जनता के बीच जाते थे। जनता की पीड़ा जानने। कुछ वैसा ही नीतीश कर रहे हैं। Read the full story »पूछताछ का ड्रामा [12
 
अविनाश
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लव, सेक्स, धोखा और भारतीय समाज : एक नजरिया

समाज में आजकल जो मुद्दा सबसे ज्यादा गर्म है वह है लव, सेक्स और उसके बाद धोखा. संस्कृति के नाम पर प्यार को बदनाम करने का क्रम जारी है. कुछ समाजशास्त्री प्यार, शारीरिक सबंध आदि को गलत मानते हैं तो कुछ इसे सही. इस हो-हल्ले में शायद कुछ अनदेखा रह गया. काफी
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प्रेम और समय

जाने कैसे ऐसा होता है जाने क्यों ऐसे होता है बीते हुए की स्मृर्तियों के साथ साथ आकर जाने कब तुम खिलवाड़ करने लगते हो मेरे फुरसत के लम्हों से| जाने कैसे हज़ारों मीलों लंबी दूरियाँ यूँ पल भर में तय हो जाती हैं और फिर समय बीतता तो है पर इसका एहसास होने
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शर्म और प्रेम

साँस उखड़ती जाती है पलकें झुकती जाती हैं गाल सुर्ख़ हुए जाते हैं ऊँगलियाँ खेलती जाती हैं बालों की घुंघराली लटों से पैर क़ुरेदते जाते हैं ज़मीन को पर लबों की हिमाकत तो देखिए कहे चले जाते हैं अभी भी हमें उनकी परवाह नहीं!
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पास दूर

दूर होने की कसक पुल बन जाती है अक्सर दिलों को क़रीब लाने को पर अति निकटता के अहसासों की आँच जाने क्यों कभी कभी विलग कर देती है दिलों को मानो संबंधों की ऊष्मा से घबरा जाते हों मन
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ऐ दोस्त !!

मेरे दोस्तों की पहचान इतनी मुशिकल नहीं " फ़राज़"वो हँसना भूल जाते हैं मुझे रोता देखकर...-- अहमद फ़राज़इस दौड़ती भागती तेज़ रफ़्तार ज़िन्दगी को ब्रेक लगा के जब कभी कुछ फ़ुर्सत भरे, कुछ सुकून भरे पल बिताने का मन होता है तो सबसे पहले ख़याल आता है किसी दोस्त
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सेंडल निकालूँ क्या ?

लड़का लड़की से - मेरे दिल में आ जाओ ! लड़की - सेंडल निकालूँ क्या ? लड़का- अरे पगली मेरा दिल है कोई मंदिर थोडी ही ना , सेंडल पहन कर ही आ जाओ !!!!!!!! More jokes...
 
Ashvin Bhatt
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ज़िक्र (एक प्रेम कहानी)-अंतिम भाग

कहते हैं कि ख्वाहिशों का कोई छोर नहीं होता । कहाँ शुरू होती हैं और कहाँ ख़त्म ये पता ही नहीं चलता । कुछ ख्वाहिशें तो ऐसी होती हैं कि खुद ख्वाहिशों को ख्वाहिश करने वाले से प्यार हो जाता होगा । सोचती होंगी कि कितना नेक बंद है जो दिल से इतनी मासूम सी ख्
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ज़िक्र (एक प्रेम कहानी) - भाग 2

सर्दियों की गुनगुनी धूप थी, आसमान पंक्षियों के होने से और भी ज्यादा खूबसूरत लग रहा था । पेड़ों ने अपना पुराना लिबास उतारकर नया धारण कर लिया था और उसमें वो कुछ ज्यादा ही खूबसूरत लग रहे थे । कहीं दूर से भीगी हुई धरती की भीनी-भीनी महक आ रही थी जैसे हवाओं
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भभक उठा जो क्रोध

भभक उठा जो क्रोध , भस्म हो गयी मति , सती हुई विमर्श की विरल विडंबना। रक्त रक्त हो गया , विधी विरक्त हो गया , प्रहार के , संहार के , श्रंगार में है संजना। घमण्ड है प्रचण्ड , मुण्ड दर्प सर्प कुण्डलित , लोभ , मोह , प्राप्ति से हो रहे नयन ललित , शुचित लग
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हर रंग लगे रसीला.......

रंग लगा हर चेहरा देखो, लाल हरा, और पीला, प्यार के रस में भरे हुए, हर रंग लगे रसीला। हर कोई राधा कृष्ण बना, कोई धर्म का डोल बजे ना, न कोई गोरा, न कोई काला, बस एक ही रंग, सजे यंहा, रंग लगा हर चेहरा देखो, लाल हरा और पीला, प्यार के रस में भरे हुए, हर रंग
 
PREETI BARTHWAL
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संत कबीर वाणीः गुण और द्रव्य की वजह से सभी प्रेम करते हैं

गुणवेता और द्रव्य को, प्रीति करै सब कोय कबीर प्रीति सो जानिये, इनसे न्यारी होय संत शिरोमणि कबीरदास जी कहते हैं कि गुणवेताओ-चालाक और ढोंगी लोग- और धनपतियों से तो हर कोई प्रेम करता है पर सच्चा प्रेम तो वह है जो न्यारा-स्वार्थरहित-हो। प्रेम-प्रेम सब कोइ
 
दीपक भारतदीप
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यमराज का व्हीकल

एक अमेरिकन को दिल्ली घुमा रहा था। अचानक, एक ब्लू लाइन बस से दूसरी ब्लू लाइन बस आगे निकल गयी। फिर पीछे रहने वाली बस ने छलांग मारी और वह फिर आगे निकल गयी। इस बस से कंडक्टर निकला और पीछे वाले ड्राइवर पर धुआंधार गोलियां चलाना शुरु कर दिया। गोलीचालक कंडक्
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ये प्यार का गुरु है ,सिखाता है कि लडकी को कैसे पटाया जाये

यह आप पर निर्भर है कि आप की क्या उम्र है और आप इस विकट समस्या से जूझ रहे हैं या नहीं. यदि आपका किसी पर दिल आ गया है और वह ( लडकी / महिला) आपको घास नहीं डाल रही . अब आप किसका सहारा लेंगे? आपको तलाश है किसी अनुभवी व्यक्ति की जो लडकी पटाने में माहिर हो
 
अरविन्द चतुर्वेदी Arvind Chaturvedi
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हर तरफ बस तू ही तू

उस मोड़ पर खड़ा था मैं फिर.. ये किसी जीवन के मोड़ कि तरह नहीं थी जो अनायास ही कहीं भी और कभी भी पूरी जिंदगी को ही घुमाव दे जाती है.. ये तो निर्जीव सड़क थी, जहां आकर मुझे अपनी आत्मा के निर्जीव होने का अनुभव सा होने लगता है.. जैसे वो था या है या ऐसा ही कुछ
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