पसंद करें
2
नापसंद करें

द्वयक्षर श्लोक : केवल दो अक्षरों से कमाल

द्वयक्षर श्लोक में, जैसा कि इसके नाम से ही स्पष्ट है, केवल दो ही अक्षरों का उपयोग करके श्लोक की रचना की जा सकती है। क्रोरारिकारी कोरेककारक कारिकाकर । कोरकाकारकरक: करीर कर्करोऽकर्रुक ॥ अनुवाद : क्रूर शत्रुओं को नष्ट करने वाला, भूमि का एक कर्ता, दुष्टों को
 
स्वार्थ
पसंद करें
3
नापसंद करें

एकाक्षर श्लोक : अदभुत कल्पनाशक्ति का आग्रह

एक ही व्यंजन का पूर्णरुपेण प्रयोग एकाक्षर श्लोक के निर्माण की अनिवार्यता है। और ऐसा करने का प्रयास करने वाले रचियता के लिये अदभुत कल्पना शक्ति का स्वामी होना जरुरी है। सातवीं सदी में जन्मे महाकवि माघ के “शिशुपाल वध” से एक श्लोक दाददो
 
स्वार्थ
पसंद करें
3
नापसंद करें

हफीज मेरठी : शायर के खून और पसीने से टपके सात सुर

शानो शौकत के लिये तू परेशान है और मेरी य’ तमन्ना कि तेरा किरदार बने यह बाँकपन है हमारा कि जुल्म पर हमने बजाय माला ओ फरियाद के शाइरी की है पैगाम ये मिला है जनाबे हफीज को अंजाम पहले सोच लें तब शाइरी करे पैरहन की मैने जब तारीफ की कहने लगे हम तुम्हे [...]
 
स्वार्थ
पसंद करें
3
नापसंद करें

उदघोषणा !

माहौल को और ज्यादा सड़ते हुये नहीं देख सके वे लोग और खड़े होकर उन्होने हुंकार भर ही दी सच के तेज से भरे, कई चेहरे एक साथ चमक उठे जोश से भरी आवाजों ने एक साथ कर दी उदघोषणा। अब धर्म के नाम पर भी हमारे रक्त में उबाल नहीं आता हमारे सम्प्रदाय के [...]
पसंद करें
2
नापसंद करें

श्याम फिर एक बार तुम मिल जाते

श्याम, कान्हा, कृष्ण… कुछ भी कह लो उन्हे, वे जीवन के मनुष्य रुप में जन्मे विराटतम स्वरुप हैं। ऐसा प्रतीत नहीं होता कि मनुष्य रुप में जीवन इससे बड़ा हो सकता है या इससे ऊपर जा सकता है। कृष्ण जीवन का उल्लास हैं, उत्सव हैं। उन्होने सिर्फ सैधान्तिक रुप
पसंद करें
2
नापसंद करें

हफीज मेरठी : तीन मोती शायर की विरासत से

कुछ लोग शायद परिचित न हों उर्दू के शायर मरहूम हफीज मेरठी और उनकी शायरी से। मेरठ के रहने वाले हफीज साब ने जिन्दगी से जुड़ी हुयी शायरी की। उनकी शायरी को केवल समय बिताने का ख्याल लिये हुये नहीं पढ़ा जा सकता क्योंकि उनके शब्द पढ़ने वाले को अन्दर तक झकझोरते हैं।
पसंद करें
3
नापसंद करें

गज़ल क्या है

सुबह के इन घंटों को गुरुदेव चौपाल काल कहा करते हैं। इन्ही घंटों में उनके तमाम शिष्य गण उनके दर्शन कर अपनी जो भी शंकाऐं होते हैं उनके सामने रखते हैं और गुरुदेव अपनी सामर्थ्य भर उनका निवारण करने की कोशिश करते हैं। आज भी रोजाना उनके दरबार में हाजिरी लगाने
पसंद करें
3
नापसंद करें

पुनर्मिलन

दूर कहीं एक तारा टूटा पास यहीं एक कोयल कूकी पास यहीं किसी ने यादें उगायीं दूर कहीं किसी ने हिचकी ली दूर कहीं किसी के नयनों में अश्रु छलके पास यहीं किसी ने आँखे पोंछी पास यहीं किसी ने ऊपर उड़ता जहाज देखा दूर कहीं किसी ने चाँद को आँखों से पिया दूर कहीं [...]
पसंद करें
3
नापसंद करें

कौन तो लिखता है, कौन तो रचता है

प्रतीत तो ऐसा ही होता है कि यह लिखा मेरे द्वारा ही जा रहा है पर क्या लिखने वाला वास्तव में “मैं” ही हूँ ? मेरे देखे मेरे समझे तो, कभी एक तीन से तेरह साल का बाल मन, कभी चौदह से उन्नीस साल का किशोर मन, कभी बीस से पचास साल का युवा मन, [...]
पसंद करें
2
नापसंद करें

स्वयं की बुराइयों का भय

मन डरता है गुलाब के उस फूल की भाँति जिसे भय हो कि जब उसे चाहने वाला उसे छूने लगेगा तो उसके हाथों में कहीं काँटे न चुभ जायें
पसंद करें
0
नापसंद करें

आवारा जिन्न-हिन्दी शायरी (awara jinna-hindi shayari

जीवन पथ पर धीमे धीमेकदम बढ़ानायह राह कहीं सहज तो कहीं कठिन है,रात्रि को चंद्रमा की इठलाती किरणों के तलेउतना ही मस्ताना जितना सह सकोक्योंकि आगे सूरज की किरणों से सजाआने वाला दिन है। अपने घर के रखवाले खुद ही बनकर रहना,किसी दूसरे को नहीं सौंपना अपने सम्मान
टैग: literature
पसंद करें
5
नापसंद करें

देख रहे हो लॉर्ड कर्जन......तुम्हारी बात सच हो रही है....सतीश पंचम

देख रहे हो लॉर्ड कर्जनकभी तुमने कहा था ठीक धरती की तरह मंथर गति से हौले-हौलेभारत में फाईलें घूमती हैं इस टेबल से उस टेबल   उस टेबल से इस टेबल  वो देखो अफजल की फाईल वह भी घूम रही है राज्य और केन्द्र के बीचकेन्द्र और राज्य के बीचठीक
 
सतीश पंचम
टैग: literature
पसंद करें
3
नापसंद करें

हिन्दी साहित्य : एक क्विज

1) “दुख भांजता ही नहीं वरन मनुष्य का शोधन भी करता है“। किस प्रसिद्ध लेखक ने अपने किस प्रसिद्ध उपन्यास की प्रस्तावना से भी पहले यह सूत्र वाक्य प्रस्तुत किया? 2) ” प्रेम कहानियों की घनघोर पाठिका, अपनी पत्नी के अनुरोध पर एक उपन्यास अधूरा
टैग: literature
पसंद करें
0
नापसंद करें

సంస్కృత సాహిత్యంలో పేరడీలు

సరస్వతి అమ్మవారు బంతి ఆడుతున్నారు. ఆ తల్లి బంతి ఆడుతున్న తీరు ముగ్గురు ఉద్దండులైన సంస్కృతకవులిలా వర్ణిస్తున్నారు(ట).దండి:ఏకో2పి త్రయ ఇవ భాతి కందుకో2యం కాన్తాయాః కరతలరాగరక్తరక్తః |భూమౌ తచ్చరణనఖాంశుగౌరగౌరః స్వస్థః తన్నయనమరీచినీలనీలః ||అయం కన్దుకః = ఆ బంతి
टैग: literature
पसंद करें
0
नापसंद करें

अनमोल वचन

ओशोदुःख का बोध दुःख से मुक्ति है , क्योंकि दुःख को जान कर कोई दुःख को चाह नहीं सकता और उस क्षण जब कोई चाह नहीं होती और चित वासना से विक्षुब्ध नहीं होता हम कुछ खोज नहीं रहे होते उसी क्षण उस शांत और अकंप क्षण में ही उसका अनुभव होता है जो की हमारा वास्तविक
 
रौशन जसवाल विक्षिप्त
टैग: literature
पसंद करें
0
नापसंद करें

मोर बाबू पढे अंगरेजी, तिलक काहे थोडा चढाया......विवेकी राय रचित एक विवाह प्रसंग पर हास्य फुहार लिये शानदार लेख.....सतीश पंचम

            छछलोल राय गाँव के एकमात्र दिखाउ वर थे। उनके पैर इतने बडे बडे कि दुकानों में उनके नाप के जूते नहीं मिलते। और सिर इतना बडा कि सिली सिलाई टोपी नहीं मिलती। बहुत दिनों तक उनके छोटे भाई की शादी इसलिये रोक कर
 
सतीश पंचम
टैग: literature
पसंद करें
0
नापसंद करें

बंजारा नमक लाया

प्रभात की कविताओं की नई किताब ’बंजारा नमक लाया’ आई है. प्रभात हमारा दोस्त है. प्रभात की कविताएं हमारी साँझी थाती हैं. हम सबके लिए ख़ास हैं. कल पुस्तक मेले में ’एकलव्य’ पर उसकी नई किताब मिली तो मैं चहक उठा. आप भी पढ़ें इन कविताओं को, इनका स्वाद लें. मैं
 
मिहिर
पसंद करें
3
नापसंद करें

उन क़दमों के निशाँ !

वो ठीक पहाड़ की चोटी पर था । जहाँ से वो उस दिशा में जाना चाहता था, जहाँ पहुँचने पर उसे मंजिल मिल जाने का एहसास हो । नही यह ठीक नहीं । उसे सम्पूर्णता का एहसास हो । जिन क़दमों के साथ वह इस चोटी पर पहुँचा था । उन पीछे रह गये क़दमों के निशाँ तो मिट गये होंगे
टैग: literature
पसंद करें
3
नापसंद करें

दस नम्बरी अध्यक्ष और सैमसुन्ग – साहित्य अकादमी गठजोड़ / जनसत्ता / अफ़लातून

भारत में खेल , संगीत और कला के क्षेत्र में उपभोक्तावाद का अनुप्रवेश ढाई -तीन दशक पहले भली-भाँति हो चुका था । संगीत सम्मेलनों ,कला-प्रदर्शनियों और खेल-कूद स्पर्धाओं को कम्पनियाँ प्रायोजित करने लगी थीं । क्रिकेट मैच में पुरस्कार ,खिलाड़ियों के लिबास ,
पसंद करें
1
नापसंद करें

एक फ़िल्म, एक उपन्यास और गांधीगिरी का अंत.

यूँ देखें तो मेरा राजकुमार हीरानी के सिनेमा से सीधा जुड़ाव रहा है. मेरा पहला रिसर्च थिसिस उनकी ही पिछली फ़िल्म पर था. तीन महीने दिए हैं उनकी ’गांधीगिरी’ को. ‘लगे रहो मुन्नाभाई’ के गांधीगिरी सिखाते गांधी ’सबाल्टर्न’ के गांधी हैं. किसी रिटायर्ड
 
मिहिर
पसंद करें
7
नापसंद करें

कौवा-बगुला संबाद : आगामी भागन कै भूमिका

राम राम भईया ! कभौ गद्य औ कभौ पद्य, साहित्य मा दुइनौ कै उपस्थिति हुवत है| वैसे तो संसकीरत मा पूरे साहित्य का काब्य कहा गा है | मुला आज के समय मा काब्य अउर गद्य मा विधागत अंतर साफ़ देखात है| मोर इरादा तौ इहै है कि दुइनौ विधन से आपन बात रखी| गद्य मा आप
 
अमरेन्द्र नाथ त्रिपाठी
टैग: literature
पसंद करें
0
नापसंद करें

An Interpreter for the Bengali Diaspora

Like Ray’s globe-trotter Manomohan Mitra (in “Agontuk” or “The Stranger”)1, the Bengali has never been a “KupoMonduk”. The Bengali migration has not just been across the barbed wires separating the two Bengals, but has often carried him across the
पसंद करें
1
नापसंद करें

समय के सिवा कोई इस लायक़ नहीं होता कि उसे किसी कहानी का हीरो बनाया जाए

मुझे यह उपन्यास लिखकर कोई खुशी नहीं हुई. क्योंकि आत्महत्या सभ्यता की हार है. परन्तु टोपी के सामने कोई और रास्ता नहीं था. यह टोपी मैं भी हूँ और मेरे ही जैसे और बहुत-से लोग भी हैं. हम लोगों में और टोपी में केवल एक अन्तर है. हम लोग कहीं-न-कहीं किसी-न-कि
 
मिहिर
टैग: literature
पसंद करें
1
नापसंद करें

कुँवरनारायण को ज्ञानपीठ मिलने की खुशी में उनकी चार कवितायें

जल्दी में प्रियजन मैं बहुत जल्दी में लिख रहा हूं क्योंकि मैं बहुत जल्दी में हूं लिखने की जिसे आप भी अगर समझने की उतनी ही बड़ी जल्दी में नहीं हैं तो जल्दी समझ नहीं पायेंगे कि मैं क्यों जल्दी में हूं । जल्दी का जमाना है सब जल्दी में हैं कोई कहीं पहुंचने
 
अफ़लातून
पसंद करें
0
नापसंद करें

বই আলোচনা ঃ ব্রাত্যজনের রুদ্ধসংগীত

ব্রাত্যজনের রুদ্ধসংগীত। দেবব্রত বিশ্বাস। করুণা প্রকাশনী। মূল্য ৫০ টাকা। ১৯২৭ সালের কলকাতা। আমহার্স্ট স্ট্রীটে অবস্থিত সিটি কলেজের রামমোহন হস্টেলের হিন্দু ছাত্ররা বায়না ধরে হস্টেলে সরস্বতী পুজো করতে দিতে হবে। সে সময়ে সিটি কলেজের প্রিন্সিপাল ছিলেন
पसंद करें
0
नापसंद करें

প্রাচীন বাংলা-লেখকগণ: তান্ত্রিক বৌদ্ধ লেখক লূইপাদ, বিরূপাদ, শবরীপাদ

চব্বিশ পরগণার পেয়ারা গ্রামে ১৮৫৫ খ্রীষ্টাব্দে মুহম্মদ শহীদুল্লাহ’র জন্ম। তাঁর শিক্ষাজীবনের পুরোটাই কাটে অধুনা পশ্চিমবঙ্গে – ক্রমান্বয়ে হাওড়া জিলা স্কুল, প্রেসিডেন্সি কলেজ (FA), সিটি কলেজ (BA) ও কলকাতা বিশ্ববিদ্যালয় (MA)-এ পড়াশোনা করেন। ১৯০৮
पसंद करें
0
नापसंद करें

जिस आग ने फूँक दिया था आने वाली सब पुश्तों का भविष्य !

दुआ में याद रखियेगा (यह लेख 23 अगस्त 2007 को अपने प्रथम हिन्दी ब्लॉग अथ (http://360.yahoo.com/kvachaknavee) पर लिखा था। yahoo द्वारा वह ३६० की ब्लॉग सर्विस बंद की जा चुकी है। उस ब्लॉग पर प्रकाशित अपनी सामग्री को धीरे धीरे यहाँ स्थानान्तरित कर रही हूँ।
 
कविता वाचक्नवी Kavita Vachaknavee
टैग: literature
पसंद करें
0
नापसंद करें

ఆమె కన్న నితడు ఘనుడు

ఇక్కడ ఆంధ్రామృతం గ్రోలి రండొకసారి.ఆతుకూరి మొల్ల ఓ మహా కవయిత్రి. ఈ కవయిత్రి శ్రీ కృష్ణ దేవరాయల ఆశ్రయం పొందగోరి, రాయల వారిని స్తుతిస్తూ ఆయనపై ఈ పద్యం చెప్పిందట. సీ || అతఁడు గోపాల కుండితఁడు భూపాలకుండెలమి నాతనికన్న నితఁడు ఘనుఁడుఅతఁడు పాండవ పక్షుఁడితఁడు పండిత
टैग: literature
पसंद करें
0
नापसंद करें

పోలిక

నా క్రితం టపాలో కామేశ్వర్రావు గారు కామెంటుతూ, సమాయుక్తం, సమన్వితం అన్న పదాలు చూడగానే చప్పున ఓ విషయం, చూచాయగా ఓ విషయం గుర్తొచ్చాయన్నారు. ఇలా ఓ విషయం చూసినప్పుడు మరో విషయం స్ఫురించటం మామూలుగా అప్పుడప్పుడు జరిగేదే అయినా, ఒకే కాలానికి, ప్రాంతానికి చెందని ఏ
टैग: literature
पसंद करें
0
नापसंद करें

হিমু

আচ্ছা এই হিমু কেস্ টা কী? সায়কায়াট্রিস্ট প্রশ্ন করেন লেখককে। উনি ব্যাপারটা ভাল করে বুঝতে চান। তার চারজন পেশেন্ট – তিনজন ছেলে, একজন মেয়ে। চারজনই বলে তারা হিমু হয়েছে। এই হওয়াটার মাত্রা অস্বাভাবিক- ওদের মধ্যে দু’জন এখন ড্রাগের উপর থাকে। লেখককে
पसंद करें
0
नापसंद करें

Amitav Ghosh’s Works – A Literary Postmortem

Had I not checked the invitation letter thoroughly I would surely have missed him. A slightly above average height, a shock of white hair and a benign smile – Amitav Ghosh, the author extraordinaire of The Shadow Lines, Calcutta Chromosome, The Hungry
पसंद करें
0
नापसंद करें

సంస్కృత చిత్రకవితలు!

ముగ్గులా? గణిత సూత్రాలా? ఏవైనా దేవతను ఆవహన చేయడానికి ఉద్దేశించబడ్డ మంత్రాలా? ఉహూ. ఇవేవి కావు. ఇవి చిత్ర కవితలట. అక్కడికెళ్ళి చూస్తే చాలు, ఆ కథా కమామీషు ఏమిటో అర్థమవుతుంది. ఇటువంటివి తెలుగులో కూడా ఎవరైనా వ్రాస్తే బావుణ్ణు. ఉదాహరణకు ఈ గదాబంధం చూడండి.
टैग: literature
पसंद करें
0
नापसंद करें

సంస్కృత బ్లాగులు

ఎక్కడో, ఏదో వెతుకబోతే, మరేదో తగిలింది. అంతా గూగులమ్మ దయ, నా ప్రాప్తం!కోలాచలం మల్లినాథ సూరి అని 15వ శతాబ్దపు గొప్ప పండితుడు. ఆయననే "వ్యాఖ్యాన బ్రహ్మ" అంటారట. కాళిదాసు కావ్యాలన్నిటికి (శిశుపాలవధం కి కూడా?) ఈయన వ్యాఖ్యానం వ్రాశారు. ఈయన తెలుగాయన. (మెదక్
टैग: literature
पसंद करें
2
नापसंद करें

तुंरत सहायता की अति आवश्यकता है / सहयोग करें

इनका नाम जानने में सहायता की तुंरत आवश्यकता है मित्रो, नीचे अंकित गीत मैंने अपने बचपन में किसी पाठ्य पुस्तक में पढ़ा है, अथवा बाद में कभी। किंतु कतई स्मरण नहीं आ रहा की यह रचना किस की है व इसे कहाँ पढा है। रचना के शिल्प व कथ्य को देखते हुए ऐसा प्रतीत
 
कविता वाचक्नवी Kavita Vachaknavee
टैग: literature
पसंद करें
5
नापसंद करें

“मैं खामोशी की मौत नहीं मरना चाहता!” ~पीयूष मिश्रा.

पीयूष मिश्रा से मेरी मुलाकात भी अनुराग कश्यप की वजह से हुई. पृथ्वी थियेटर पर अनुराग निर्मित पहला नाटक ‘स्केलेटन वुमन’ था और पीयूष वहीं बाहर दिख गए. मैंने थोड़ा जोश में आकर पूछ लिया कि आपका इंटरव्यू कर सकता हूँ एक हिंदी ब्लॉग के लिए - साहित
 
मिहिर
टैग: literature films
पसंद करें
0
नापसंद करें

A Gen-X bangaal and Her Gain of Inheritance

In my very first attempt to write about an author, that too someone who’s been labelled as “The youngest female writer to win the Man Booker prize,” I was somehow curious to know how the author (thankfully something like ‘authoress’ isn’t used as much