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सफलता हेतु कार्य अधुरे न छोड़े, कार्य पूरा करें

आधे-अधुरे कार्य आपके व्यक्तित्व के अधुरेपन को दर्शाते है। सफलता हेतु हाथ में लिया काम पूरा करें, वे आपको पूरा बनाते है। हमारा लक्ष्य अस्तित्व की योजना को पूरा साकार करना होना चाहिए। कार्य को बीच में छोड़ देना पहले की मेहनत को बेकार करता है। मैं जब आठवीं
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सफलता का मंत्र : प्रबल इच्छा से बिलगेट्स बनते है

प्रबल इच्छा क्या है ? प्रबल इच्छा का तात्पर्य उस दृढ़ निश्चय से है जो हमें किसी लक्ष्यप्राप्ति के लिए करता होता है। यह लक्ष्य शक्ति, ओहदा, धन या ऐसी ही अन्य कोई वस्तु हो सकती है। कुछ बड़ा पाने या करने के लिये महत्त्वाकांक्षा अनिवार्य है। जीवन में कुछ
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प्रबल इच्छा: सफलता का प्रारम्भिक सोपान

प्रबल इच्छा की सफलता प्राप्ति में महत्वपूर्ण भूमिका जल को वाष्प में परिवर्तित करने के लिये उसे 1000 सेन्टीग्रेड तक गरम करने पर ही परिणाम मिलता है। जल 1000 सेन्टीग्रेड पर ही उबलता है और तब वाष्प में परिवर्तित होता है। आवश्यक डिग्री तक गर्म नहीं करने पर
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व्यक्ति को बदलने में अनुभव की भूमिका

अनुभव कोष की बढ़त ही आपकी बढ़त अनुभव कोष सबसे बडी पँूजी हैं। अनुभव द्वारा ही हम बदलते हैं। हम अपनी पुरानी आदतों तक को नए अनुभव कर उन्हे बदल सकते हैं। हम अपनी धारणाओं,विचारंो व जीवन को अनुभव द्वारा बदल सकते हैं। एक मां का बेटा उसको छोड़ किसी और की कोख से
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आप कृष्ण से बेहतर है!

आपकी स्थिति कृष्ण से बेहतर है!अरे! हॅसने की जरुरत नहीं है। इसके लिए श्री कृष्ण के जीवन से अपने जीवन की परिस्थिति की तुलना करने की जरुरत है। हमारे में से किसे का जन्म जेल में नहीे हुआ। जबकि योगेश्वर कृष्ण का जन्म [...]