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सूर्योदय जीवनोदय

खामोश, रुठे रुठे अंदाज में चलती ज़िन्दगी उदास दिल, जाने किन तूफानों के आने की आशंकाओं से ग्रस्त ऐसे ही चल रहा था ऐसे ही चलता रहता अगर उस सुबह अचानक सूरज की इठलाती किरणों ने एक वृत बनाकर मुझे घेर न लिया होता और छेड़ कर मुस्कुराकर पूछा न होता ” हाल
 
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मैं कौन हूँ कब जानूंगा ?, क्या केवल अपना ही नाम ?

मैं कौन हूँ कब जानूंगा ?, क्या केवल अपना ही नाम ?दूध पीना - हंसना - रोना - खेलना ही है मेरा काम,जाना तो केवल अपना और परिवार के सदस्यों का नाम,कुछ करना है तो पढ़ना है, क्योंकि जरुरतमंदो का है यह काम,मुझे दोस्त भी मिले उनका भी था यही काम,मैं कौन हूँ कब
 
हरीश कुमार तेवतिया
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ये सज्जन जरुर ही राम की वानर सेना में रहे होंगे

इन सज्जन के करतब देखिये। ये गुरुत्वाकर्षण को धता बता रहे हैं। मानव होने की सत्यता उनके सामने कोई बाधा प्रस्तुत नहीं करती। वे तो एक वानर से भी ज्यादा कुशलता से कहीं भी किसी भी ऊँची जगह पर छढ़ जाते हैं बिना किसी रस्सी के सहारे के या किसी और प्रकार की
 
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मासूम सी एक ख़्वाहिश...

पूरे दिन ऑफिस के बिज़ी हेक्टिक स्केड्यूल के बाद जब घर पहुँच के टी.वी. ऑन करो तो कुछ भी देखने लायक नहीं आ रहा होता है.... आधे चैनल्स पर तो वही सास-बहु के गंदे सीरीअल्स चल रहे होते हैं जिसमें घर की महिलायें एक दूसरे के लिये हमेशा कोई ना कोई षड्यंत्र रचा
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हबीब तनवीर : हीरे की अँगूठी

24 अक्टुबर 1995 को आये पूर्ण सूर्यग्रहण ने प्रख्यात रंगकर्मी हबीब तनवीर साब का कविरुप जाग्रत कर दिया था और इन्होने इस अवसर पर निम्नांकित कविता को रचा था। आज हबीब साब को गुजरे हुये एक साल हो गया है। हबीब साब को श्रद्धांजलि उन्ही की कविता दे सकती है। हीरे
 
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शिशु जन्म : ममता नहीं सुरक्षित केवल स्त्री के लिये

शिशु को जन्म देने का विशेष अहसास ही ऐसा प्रतीत होता है जो मानव और पशु दोनों वर्गों की स्त्री प्रजाति में एक जैसा है। एकदम शांत किस्म के जानवरों की मादाओं को भी अपने नवजात शिशु की रक्षा के लिये आक्रामक रुख अपनाते हुये देखा गया है। नीचे दिये गये वीडियो में
 
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अभिनय

हे अभिनेता! तुम अभिनय को अपने द्वारा निभाए गये पात्र को वास्तविक न मानने लगना| तब अभिनय भी एक ऐसा नशा हो जाएगा जो जीवन के वास्तविक स्वरूप को हटाकर कहीं और व्यस्त कर देता है दिमाग को और कुछ समय के लिए व्यक्ति जो वह नहीं है वही होने का भ्रम पाल लेता
 
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खबरदार श्रीमान नेता जी

सुनो नेता जी तुम क्यों एक नंगे बच्चे जैसा व्यवहार करते हो जो अपनी आँखें बंद कर लेता है और सोचता है कि अब उसे कोई नहीं देख रहा। तुमने कछुआ तो देखा ही होगा जो अपने खोल के अंदर घुस कर छिप जाता है और सोचता है कि खतरे से बच गया है। तुम [...]
 
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पहचानविहीन लोगों की कब्रगाह (वियना)

आस्ट्रिया की राजधानी वियना में डेन्यूब नदी के किनारे एक ऐसी कब्रगाह है जहाँ ऐसे लोग दफन हैं जो किसी भी कारण से डेन्यूब में डूब कर मर गये और उनके शव नदी की मुख्य धारा से थोड़ा हट कर इस मुहाने पर पहुँच गये। इन लोगों की शिनाख्त नहीं हो पायी अतः इनके लिये
 
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SAKT PAN****

My hubby's uncle who I mentioned in my earlier post has a salt pan where natural salt is produced during the summer months .As we were staying with our uncle, our first morning in Goa always starts with a walk to his salt pan and enjoying the view around
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उदघोषणा !

माहौल को और ज्यादा सड़ते हुये नहीं देख सके वे लोग और खड़े होकर उन्होने हुंकार भर ही दी सच के तेज से भरे, कई चेहरे एक साथ चमक उठे जोश से भरी आवाजों ने एक साथ कर दी उदघोषणा। अब धर्म के नाम पर भी हमारे रक्त में उबाल नहीं आता हमारे सम्प्रदाय के [...]
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श्याम फिर एक बार तुम मिल जाते

श्याम, कान्हा, कृष्ण… कुछ भी कह लो उन्हे, वे जीवन के मनुष्य रुप में जन्मे विराटतम स्वरुप हैं। ऐसा प्रतीत नहीं होता कि मनुष्य रुप में जीवन इससे बड़ा हो सकता है या इससे ऊपर जा सकता है। कृष्ण जीवन का उल्लास हैं, उत्सव हैं। उन्होने सिर्फ सैधान्तिक रुप
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गज़ल क्या है

सुबह के इन घंटों को गुरुदेव चौपाल काल कहा करते हैं। इन्ही घंटों में उनके तमाम शिष्य गण उनके दर्शन कर अपनी जो भी शंकाऐं होते हैं उनके सामने रखते हैं और गुरुदेव अपनी सामर्थ्य भर उनका निवारण करने की कोशिश करते हैं। आज भी रोजाना उनके दरबार में हाजिरी लगाने
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कौन तो लिखता है, कौन तो रचता है

प्रतीत तो ऐसा ही होता है कि यह लिखा मेरे द्वारा ही जा रहा है पर क्या लिखने वाला वास्तव में “मैं” ही हूँ ? मेरे देखे मेरे समझे तो, कभी एक तीन से तेरह साल का बाल मन, कभी चौदह से उन्नीस साल का किशोर मन, कभी बीस से पचास साल का युवा मन, [...]
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UNCLE'S GARDEN ****

For most the days that we stayed in Goa we spent most of our time at my hubbys favorite uncles house, This house is more than 150 yrs old and was built by my hubby's great great grandfather.Sorry that did not click pictures of this fabulous house ,Its
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FLOWERS IN GOA****

People staying in Goa are fortunate to have a garden or an extra space where they can grow plants , I saw these lovely flowers wherever I went and they were so pleasing to the eye .I want to share some of the pictures i clicked of flowers grown at our
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प्रतिबिम्ब

अकेलेपन के साए सच लगते हैं इस अंधेर कमरे में कुछ ढूँढता एक कदम लम्बे रास्ते चले थे एक, निकले कई थामे वक़्त का हाथ दूर निकल आये अरसा लगता है पल-पल पिछड़े मोड़ पर थमे थे न मूड़ सके हम, रुके कई यह कैसी है जंजीरें पैरों में लिए फिरते है सीने से लगाये [...]
 
mequitnever
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पानी पर चलने की कला: कितना सच कितना झूठ

भारत में तो सैंकड़ो किस्म की बातें तरह तरह के चमत्कारों के बारे में फैली रहती हैं। सदियों से पानी पर चलने की संभावना के बारे में बातें चलती रही हैं और कुछ लोग ऐसा दावा भी करते रहे हैं कि वे पानी पर चल सकते हैं। कुछ दिन पूर्व ऐसी खबर भी समाचार पत्रों [...]
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जीवन बस यहीँ अभी

मन ही मन दुखी तो वह पहले से ही रहता था पर जब से उसने एक सस्ते दामों पर मिल जाने वाली ज्योतिष की एक किताब में पढ़ लिया था कि उस जैसे जातक अपने किये कामों और भूलों के कारण पछताते रहते हैं तब से तो उसने दुख को ही अपने जीवन का ऐसा [...]
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Life is like pre-paid card with limited validity.... what do you say..

Speech by Chetan Bhagat at Symbiosis ...     Don't just have career or academic goals. Set goals to give you a balanced, successful life. I use the word balanced before successful since 'Balanced' means ensuring your health, relationships,
 
Chandramouli Malleda
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प्रेम और अंहकार

समय रहते एक बार तो जवाब दे दो मेरी पुकार का| बाद में ऐसा ना हो समय उलझा ले अपनी व्यस्तता के जाल में मुझे| और विवश मै चाहकर भी तुम्हारी आवाज ही न सुन पाँऊ |
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आज एक हर्फ़ को फिर ढूंढता फिरता है ख्याल

आज एक हर्फ़ को फिर ढूंढता फिरता है ख्याल मदभरा हर्फ़ कोई, ज़हर भरा हर्फ़ कोई हर्फ़ = letter, ख्याल = imagination, idea मदभरा = filled with eulogy, ज़हर = poison, भरा = filled with दिलनशी हर्फ़ कोई, क़हर भरा हर्फ़ कोई आज एक हर्फ़ को फिर ढूंढता फिरता है ख्याल
 
mequitnever
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इक टुकड़ा ज़िन्दगी...

ये ज़िन्दगी भी कितनी "अन्प्रेडिकटेबल" होती है... है ना ? अगले ही पल किसके साथ क्या होने वाला है कुछ नहीं पता... सच कहें तो हमें लगता है ज़िन्दगी का ये "अन्प्रेडिकटेबल" होना इसे और भी खूबसूरत बना देता है... ज़िन्दगी के प्रति एक आकर्षण, एक रोमांच बना रहता
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अंतरिम

क्या है, क्यों है, कैसे है सोचता था जब पाया तो बहुत खुश हुआ उसके बाद क्या ? पाया, वो मिल गया अब कहाँ, किधर, किसको ढूँढना, चाहत, प्यास, होड़, जिद्द -लक्ष्य के अनेक रूप है पर मैंने एक नया रूप पाया -अलक्ष्य से लक्ष्य का लक्ष्य शून्य ! अंतरिम, मध्यांतर,
 
mequitnever
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चल मालिश करा के आते हैं!!?

छोटी काशी बीकानेर में हमेशा ही कुछ न कुछ धार्मिक आयोजन होते रहते हैं। कुछ बड़े तो कुछ छोटे। एक बार एक महाराज आए। प्रखर जी महाराज। उन्‍होंने बीकानेर के धरणीधर महादेव मंदिर में 1008 कुण्‍डीय महायज्ञ शुरू किया था। एक महीने तक मंदिर के पास की सूखी हुई तल
 
सिद्धार्थ जोशी Sidharth Joshi
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कौआ छू गया

यह एक मज़ेदार प्रसंग है | मर्द और औरत दोनों ही इस बात को बड़ी दिलचस्पी से लेते है | मगर बूढ़े लोग – शरीर से या दिमागे से बूढ़े लोग – इसकी बात करने को क्रोधी नज़र से देखते है | ऐसा ही कुछ था मेरे भी परिवार में| छोटा था तो स
 
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