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कैसे भाये सखी रुत सावन की: मल्हार राग, लताजी और सी रामचन्द्र जोड़ी की एक सुन्दर जुगलबन्दी

सावन की ऋतु, बरखा की बूंदे और मल्हार राग...अगर यह तीनों एक साथ मिल जायें तो किसको नहीं सुहायेगा! पर हमारी नायिका को भी सावन की रुत नहीं भा रही, अपनी सखी से शिकायत कर रही है कि कैसे भाये सखी रुत सावन की.......! क्यों कि उसके पिया उसके पास नहीं है, मिल
 
सागर नाहर
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ऐ मेरे वतन के लोगों

गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं लताजी की आवाज में यह देशभक्ति का गीत सुनिए जो हमें शहीदों की याद और उनके प्रति हमारे कर्तव्यों की दिलाता है.
 
Suresh Chnadra Gupta
टैग: Lata Ji