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तरक्की और कामयाबी-हिन्दी शायरी

अपनी मदद खुद कर सको, उतना ही आगे जाना। तरक्की और कामयाबी के ख्वाब में यूं न खो जाना।। बिकते हैं सपने बाज़ार में, मु्फ्त का खेल दिखाकर, तरक्की के रास्ते चल, उधार के जाल में न फंस जाना ।। ———– मोहब्बत शादी के अंजाम तक आशिक और माशुका
 
दीपक भारतदीप
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पकाना रोटी और खबर का-हास्य व्यंग्य कविता

बोरवेल का ढक्कन खुला देख कर सनसनी खबर की तलाश में भटक रहे संवाददाता ने कैमरामेन से कहा ^रुक जाओ यहाँ लगता है अपनी सनसनीखेज खबर पक रही है अपनी टांगें वैसे ही थक रही है. पास से निकल रहा चाय की रेहडी वाला भी रुक गया और बोला ^साहब अच्छा हुआ! आज अतिक्रमण
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