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निकलने को है राजाज्ञा : ज्ञानेन्द्रपति

[ वरिष्ट कवि ज्ञानेन्द्रपति से कल सैमसुंग-साहित्य अकादमी पुरस्कार की बाबत चर्चा हुई तो उन्होंने कला संकाय के चौराहे पर यह कविता सुनाई तथा इसे छापने की इजाजत दी । कवि के प्रति आभार ।] निकलने को है राजाज्ञा (एक तारकशाली साहित्यिक संगोष्ठी में कविता की
 
अफ़लातून