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राग-विराग : श्रीलाल शुक्ला ने छोटा किया जीवन का विस्तार

तेज रफ्तार से भागती ज़िन्दगी और उसके पीछे भागते लोग। समय की कमी हर जगह दिखायी देती है। साहित्य रचते समय दोहा, हाइकू, त्रिवेणी, और चौपाई आदि लिखने के अलावा लेखक के ऊपर ऐसा दबाव नहीं होता कि उसे संक्षेप में अपनी कल्पना को संजोना है। लेखक विस्तार में जाना
 
स्वार्थ
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श्याम फिर एक बार तुम मिल जाते

श्याम, कान्हा, कृष्ण… कुछ भी कह लो उन्हे, वे जीवन के मनुष्य रुप में जन्मे विराटतम स्वरुप हैं। ऐसा प्रतीत नहीं होता कि मनुष्य रुप में जीवन इससे बड़ा हो सकता है या इससे ऊपर जा सकता है। कृष्ण जीवन का उल्लास हैं, उत्सव हैं। उन्होने सिर्फ सैधान्तिक रुप
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ஸ்டாலின்

ஸ்டாலின் – “மூத்த பத்திரிகையாளர் பார்வையில்” என்ற இந்தப் புத்தகத்தை எழுத்தாளர் சோலை அவர்கள் எழுதி, விகடன் பிரசுரம் சில மாதங்கள் முன்பு வெளியிட்டது. வடக்கு உஸ்மான் ரோடு ’நியு புக் லாண்டில்’ சொல்லி வைத்து, பிரதிகள் மீண்டும் வந்தவுடன் அழைத்தார்கள், சில
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3 Books I read…

I used to live 35km away from my work place. Sometimes I complained, sometimes I enjoyed it, but now that I don’t do that journey any more, the memories of my bus journey to and from the company haunt me the most. This write-up is not about those
 
Nitin Mule
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वयं रक्षामः

क्या आपने वयं रक्षामः पढ़ी है? यदि नही तो जल्द ही पढिये| अदभुत् और सुन्दर पुस्तक है यह| आचार्य चतुरसेन शास्त्री द्वारा लिखी यह पुस्तक पौराणिक परिप्रेक्ष्य को नए अंदाज और व्याख्या के साथ... [[ This is a content summary only. Visit my website
 
Ravi Prakash
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