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राग-विराग : श्रीलाल शुक्ला ने छोटा किया जीवन का विस्तार
तेज रफ्तार से भागती ज़िन्दगी और उसके पीछे भागते लोग। समय की कमी हर जगह दिखायी देती है। साहित्य रचते समय दोहा, हाइकू, त्रिवेणी, और चौपाई आदि लिखने के अलावा लेखक के ऊपर ऐसा दबाव नहीं होता कि उसे संक्षेप में अपनी कल्पना को संजोना है। लेखक विस्तार में जाना
Jun 05 2010 07:42 AM



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