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आओ आज नाम बदल लें…!

आओ आज नाम बदल लें…! ले लो इस नाम से जुड़ी सब दौलत और शौहरत, मुझे बेनामी का सुकून लौटा दो…. अक्सर तुम्हे देखा है नुक्कड़ पे बच्चो के साथ फुटबाल खेलते, मैं भी सनडे को साहब के साथ गोल्फ खेलने जाता हूँ….. बोलो तो खेल बदल लें…
 
Gaurav Sangtani
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दर्द…

हम दर्द को दबाते रहे, ये फूट फूट निकलता रहा कभी चेहरे से झलकता रहा, कभी आँखों से छलकता रहा. हम हर मोड़ पर पुकारा किए और वो हमसे बचके चलता रहा. कितनी दफ़ा गिरे हम राहों मे वो बस दूर से तकता रहा. हमेशा ख्वाब सा ही बनकर रहा मेरे लिए वो, मैं हरदम पकड़ता 
 
Gaurav Sangtani
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जादूगरी

ये कैसी है तेरे इश्क की जादूगरी, अभी तू यहीँ है और नहीं अभी | अभी तुझसे मिलकर हँसे थे हम, अभी तुझे खोकर रो दिये भी | तू ही तन्हाइयोँ में साथ मेरे, तू ही भीङ में करे तन्हा | तू ही तो ख्वाबोँ में है मेरे, तू ही रातों को जगाये भी | य
 
Gaurav Sangtani
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काश कभी…..

काश कभी तुमने मेरी चाहत को समझा होता. चाहत ये ना थी सब कुछ मिले, पर कभी कुछ तो मिला होता…. हर क़दम पे तेरे साथ चले थे हम, किसी क़दम पे हमें भी इसका सिला मिला होता…. काश कभी तुमने मेरी चाहत को समझा होता. अब हम थक गये हैं इस चाहत से, इस जीन
 
Gaurav Sangtani
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तेरी याद में

कभी यूँ ही लिखा था कुछ तेरी याद मे, तेरी याद आयी तो फिर से गुनगुना दिया आज…. “दर्द की इंतहाँ हो गयी है यारों | सुबह चले थे अब शाम हो गयी है यारों | थक गयें हैं लेकिन कोई सहारा नहीं मिलता | समंदर में मौजों को किनारा नहीं मिल
 
Gaurav Sangtani
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पर अब भी बहुत कुछ याद है मुझे

बहुत भुलाना चाहा, बहुत कुछ भुलाया, पर अब भी बहुत कुछ याद है मुझे | वो इश्क की राहों में पहले कदम, उन कदमों पे लङखङाना और संभलना याद है मुझे || वो तेरा नजरे मिलाना और पलकें झुकाना याद है मुझे | वो तेरा सब कुछ समझना और बच के निकलना
 
Gaurav Sangtani
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बात इतनी सी है

जो होना है वो होता है, तेरी मेरी बिसात कुछ भी नहीं. मैं जो यूँ अक्सर उदास रहता हूँ, बात इतनी सी है कि……… बात कुछ भी नहीं. - अज्ञात (कहीं सुना था कभी)
 
Gaurav Sangtani
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समझे नहीं जो खामोशी मेरी

समझे नहीं जो खामोशी मेरी, मेरे लब्जों को क्या समझेंगे | बचते रहे उम्र भर साये से मेरे, मेरे जख्मों को क्या समझेंगे | भूल जाना यूँ तो नहीं है, रवायत मोहब्बत की | समझे नहीं जो हालात मेरे, इन रस्मों को क्या समझेंगे | - गौरव संगतानी
 
Gaurav Sangtani
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एक शेर

हमें अश्कों से ज़ख़्मों को धोना नही आता | मिलती है खुशी तो उसे खोना नही आता || सह लेते हैं हर गम हस के , और वो कहते हैं कि हमें रोना नही आता…|| - अग्यात
 
Gaurav Sangtani
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शाम

शाम होते ही चरागों को बुझा देता हूँ मैं, इक दिल ही काफी है तेरी याद में जल जाने के लिए | -अग्यात
 
Gaurav Sangtani
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तेरा नाम

नज़्म उलझी हुई है सीने में, मिसरे अटके हुए हैं होठों पर उड़ते-फिरते हैं तितलियों की तरह, लफ्ज़ कागज पे बैठते ही नहीं कब से बैठा हुआ मैं जानम, सादे काग़ज़ पे लिखके नाम तेरा बस तेरा नाम ही मुकम्मल है, इससे बेहतर भी नज़्म क्या होगी……….
 
Gaurav Sangtani
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मंजिलें भी उसकी थी…!

मंजिलें भी उसकी थी, रास्ता भी उसका था | एक मैं अकेला था, काफिला भी उसका था | साथ साथ चलने की सोच भी उसकी थी, फिर रास्ता बदलने का फैसला भी उसका था | आज क्यों अकेला हूँ, दिल सवाल करता है | लोग तो उसके थे, क्या खुदा भी उसका था…
 
Gaurav Sangtani
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वो चाहत कहाँ से लाओगे…!

जितना चाहा है तुम्हे…. वो चाहत कहाँ से लाओगे…! चाहत मिल भी गयी तो ये दिल कहाँ से लाओगे..! दिल ढूँढ भी लिया तुमने तो वो इतना जल नही पाएगा, मैं फिर कहता हूँ….. जितना चाहा है तुम्हे कोई चाह नही पाएगा…! - गौरव संगतानी
 
Gaurav Sangtani
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मेरा मुक़द्दर….!

रातों को चुपके से कोई साया आता है, हवा का हर झोंका तेरी याद लाता है | कब तक यूँ ही तपड़ता रहूँगा मैं, क्यों हर बार मेरा मुक़द्दर मेरे दर से लौट जाता है || गौरव संगतानी
 
Gaurav Sangtani
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आख़िर क्यूँ..

कितनी दफा हम पूछते हैं न….. आख़िर क्यूँ..??? कुछ बातों का कोई कारण नही होता कोई अर्थ नहीं होता कोई तर्क नहीं होता आप स्वीकारें न स्वीकारें…. कोई फर्क नही होता….!!! कुछ सवालों का कोई जवाब नही होता कोई शुरुआत नही होती कोई अंत नहीं होत
 
Gaurav Sangtani
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कुछ प्यारे एस. एम. एस (लघु संदेश सेवा)

गीले काग़ज़ क़ी तरह है ज़िंदगी अपनी,कोई जलाता भी नहीं और कोई बुझाता भी नहीं |इस कदर अकेले हो गये हैं आज कल,कोई सताता भी नहीं और कोई मनाता भी नहीं ||___________________________________आँखो मे महफूज़ रखना सितारों को,राह मे कहीं ना कहीं र
 
Gaurav Sangtani
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पागल दिल था

कल तुम गुजर रहे थे , या कोई ग़ज़ल गुनगुना रहा था …. कल आहट थी कोई पहचानी , या कोई दरवाजे पर आ आ के जा रा था …. कल चाँद था फलक पर , या तेरा चेहरा मुस्कुरा रहा था …. मैने बहुत रोका मगर , वो ना था ना नज़र आरहा था …. पागल दिल था श
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पागल दिल था

कल तुम गुजर रहे थे , या कोई ग़ज़ल गुनगुना रहा था …. कल आहट थी कोई पहचानी , या कोई दरवाजे पर आ आ के जा रा था …. कल चाँद था फलक पर , या तेरा चेहरा मुस्कुरा रहा था …. मैने बहुत रोका मगर , वो ना था ना नज़र आरहा था …. पागल दिल था श
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क्या करूँ

दिल से तेरा ख्याल ना जाये तो क्या करूँ । तू ही बता तेरी याद आये तो क्या करूँ । हसरत है कि तुझे इक नजर देखूँ , किस्मत अगर ना दिखाये तो क्या करूँ । चारों तरफ़ तू ही नजर आये तो क्या करूँ , हवाये तेरी आवाज सुनाये तो क्या करूँ । मैं सर झुकाता हूँ सजदे में
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गुनाह होते हुऎ देखा

मैने खुद को ही तबाह होते हुऎ देखा , जर्रे जर्रे में गुनाह होते हुऎ देखा । रग रग में लहू बन के जो दौड़ता था, मैनें उसको भी स्याह होते हुऎ देखा । उचाँईयों से ना मेरा जिक्र करो , खुद को गर्दिश में पनाह होते हुऎ देखा । जो समझता था मुझे मुझसे ज्यादा , मैने
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कल

कल याद मेरी उसे रुला आई है । कल बात मेरी बिगड़ती बना आई है । कल शाम सुबह सा मन्ज़र कर , कल रात मेरी पतझड़ बहार आई है । कल क्या था कुछ खास नहीं , कल शाख मेरी लहरा लहरा आई है । कल चुप चाप दबे पावं चला आया , कल आवाज़ मेरी वहाँ से आई है । कल-कल [...]
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हौसलों के देश में

एक कदम ही रखा ,हो खडा़ महल गया , दिल मेरा सम्भल गया , टूट कर सवरं गया , हौसलों के देश में , हौसलों के देश में । देश है ये इक नया , इक अलग जहाँन है , हारता नहीं कोई , जीत ही मुकाम है , हौसलों के देश में , हौसलों के देश में । ना कहीं [...]
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कल

कल याद मेरी उसे रुला आई है । कल बात मेरी बिगड़ती बना आई है । कल शाम सुबह सा मन्ज़र कर , कल रात मेरी पतझड़ बहार आई है । कल क्या था कुछ खास नहीं , कल शाख मेरी लहरा लहरा आई है । कल चुप चाप दबे पावं चला आया , कल आवाज़ मेरी वहाँ से आई है । कल-कल [...]
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क्या लिखूं….

क्या लिखूं…. पैगाम लिखूं… तुझे जज़्बात लिखूं… या अपने ये हालात लिखूं…. क्या लिखूं…. रातें लिखूं… वो बातें लिखूं… या ठहरी हुई मुलाक़ातें लिखूं… क्या लिखूं…. जीत लिखूं… इसे हार लिखूं….
 
Gaurav Sangtani