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मालिक तेरी रजा रहे, बाकी न मैं रहूँ न मेरी आरजू रहे

जहाँ  तक  मैं  समझता  हूँ  कि  पिछली सँदर्भित  कड़ी  सहित  परिचय श्रृँखला  की  यह  कड़ियाँ  सँभवतः  श्री भगवतीचरण वर्मा के कनिष्ठ भ्राता और बिस्मिल जी के अभिन्न मित्र श्री शिव वर्मा ने
 
डा. अमर कुमार
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पुनःआरँभ बिस्मिल आत्मकथ्य- और इसके पहले

इससे पहले कि मैं आत्मकथा की कड़ियों का पुनःप्रकाशन आरँभ करूँ, मैं  देश  के  गौरव  अमर  हुतात्मा के सम्मुख क्षमादान माँगते हुये नतमस्तक हूँ । उस  समय  जबकि  इस  आत्मकथा का  प्रवाह अपने  अँतिम 
 
डा. अमर कुमार