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१४११ (चौदह सौ ग्यारह) बचे हैं, तुझे मिला के, मुझे मिला के |
१४११ (चौदह सौ ग्यारह) बचे हैं,
तुझे मिला के, मुझे मिला के |
तुम शावक व्याघ्र हो, मैं वयस्क हूँ
कुछ बूढ़े हैं, कुछ हम जैसे हैं
गिनती के अब कुछ ही बचे हैं,
तुझे मिला के, मुझे मिला के ||
पर कुल का, पर, निज जाति का है तू
सहज वृत्ति कि, तेरा
Feb 20 2010 10:27 AM



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