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मेरे कोरे दिल की कल्पना हो तुम

मेरे कोरे दिल की कल्पना हो तुम,कविता में पिरेशब्दों की व्यजंना हो तुम,मर्म-स्पर्शी नव साहित्य कीसृजना हो तुम,नव प्रभा की पथ प्रदर्शकलालिमा हो तुम,मेरे कोरे दिल की कल्पना हो तुम,स्वप्न दर्शी सुप्त आखों मेंबसी तलाश हो तुम,सावन की कजरी में घुलीमिठास हो
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हवा के झोंके में तुम्हारी याद ...........................कविता

हवा के झोंके ने बंद पन्नों को बिखेरा है , आज फिर से , जिसमें तुम्हारी चंद यादें फिसल गयी, फर्श पर आंखों के मोती बनकर । मैंने रोकना चाहा खुद को पर नाकाम ही रहा , तुम्हारी तस्वीर पर पड़े आंसू ने महसूस करना चाहा था तुम्हारे स्पर्श को , तुम्हारी खुश्बू क
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