मेरे कोरे दिल की कल्पना हो तुम
मेरे कोरे दिल की कल्पना हो तुम,कविता में पिरेशब्दों की व्यजंना हो तुम,मर्म-स्पर्शी नव साहित्य कीसृजना हो तुम,नव प्रभा की पथ प्रदर्शकलालिमा हो तुम,मेरे कोरे दिल की कल्पना हो तुम,स्वप्न दर्शी सुप्त आखों मेंबसी तलाश हो तुम,सावन की कजरी में घुलीमिठास हो
May 04 2010 11:01 PM



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