कहीं भी तो लहर की बानगी हमको नहीं मिलती
नदी के तीर पर ठहरेनदी के बीच से गुज़रेकहीं भी तोलहर की बानगीहमको नहीं मिलतीहवा को हो गया है क्यानहीं पत्ते खड़कते हैं'घरों में गूँजते खंडहरबहुत सीने धड़कते हैंधुएँ के शीर्ष पर ठहरेधुएँ के बीच से गुज़रेकहीं भी तोनज़र की बानगीहमको नहीं मिलतीनक़ाबें पहनते
Apr 25 2010 10:38 PM



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