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अपने अनुभव रूपी ज्ञान का दूसरो के लिए भी प्रयोग कर लेना चाहिए!फायदा अपना भी होगा और दुसरो का भी!कुछ सीखो यहाँ से-कुंवर जी,(हास्य-वयंग्य)

हमें अपने अनुभवों का लाभ सभी को देना चाहिए!ऐसा मेरा मानना है!ऐसी ही एक घटना मै आपको सुनाने जा रहा हूँ,शायद उसके बाद आपका भी ऐसा ही मानना हो जाए!हुआ यूँ कि हम और राणा जी,किसी पार्टी में शिरकत करने पहुँच गए!अब ये बताने का कोई औचित्य नहीं लग रहा कि हम
 
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देखना कैसे-कैसे मर्द है यहाँ?-कुंवर जी,

बैलगाड़ी धेरे-धीरे टुमक-टुमक चल रही थी जी!अब वो तो बैलगाड़ी थी ऐसे ही चलनी थी!जितने यात्री उसमे बैठे वो बोर भी नहीं हो रहे थे,सभी को आदत थी उसमे सफ़र करने की!उनमे एक भाई साहब कुछ अलग से दिख रहे थे!सौभाग्य से या दुर्भाग्य से घडी केवल उन्ही के पास थी
 
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एक रेल 150 की.मी./घंटा की रफ़्तार से आ रही है, और दूसरी 123 की.मी../घंटा की रफ़्तार से जा रही है,तो बताओ मेरी उम्र कितनी?"(हास्य-वयंग्य)

बहुत  पुरानी  तो  बात  नहीं  है  खैर!फिर भी पुरानी तो है ही,काफी समय से सुनते आ रहे है!हमारे विद्यालय की दीवारे भी तब ज्यादा ऊँची नहीं होती थी!ये तो अब करनी पड़ी जब विद्यालयों की लड़कियों को
 
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हिन्दुओ की ये भावना के "कुत्ता भौंक कर अपने आप चुप हो जाएगा" काफी हद तक जिम्मेवार है कुत्ते की भों-भों सुनने के लिए!

आजकल जो ब्लोग्युद्ध सा छिड़ा हुआ है ब्लॉगजगत में हिन्दू-मुस्लिम संस्कृतियों को लेकर अपने-आप में दुर्भाग्यपूर्ण है!और जो वास्तव है में वो तो अति-घृणित भी! लेकिन जब कोई हमारे बारे में कुछ गलत कह रहा है तो उसे उसका जवाब भी तो मिलना चाहिए!जो सक्षम है
 
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नाम सब से अच्छा "तम्बकतुरा"!...(हास्य-वयंग्य)

एक गरीब के घर गलती से लड़का पैदा हो गया!क्षमा चाहूंगा,गरीब अधिकतर गलती ही करता है ना इसी लिए यहाँ भी 'गलती से' निकल गया!हाँ तो वो पैदा तो हो गया पर अब उसका नाम क्या रखे जी?बड़ा ही कठिन सा प्रशन!हमारे-तुम्हारे लिए तो नहीं पर उस गरीब के लिए
 
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नारी है अत्याचारी........(हास्य-वयंग्य)

कल ही महिला आरक्षण बिल पारित हुआ और आज मेरे पास ये सन्देश कई बार कई लोगो ने भेजा!मुझे लगा आपको भी ये बताना चाहिए...let,s celebrate men,s day...बेचारा मर्द.....अगर औरत पर हाथ उठाए तो ज़ालिम,अगर पिट जाए तो
 
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अजीब दास्ताँ है ये! (हास्य-व्यंग्य)

सर्वप्रथम तो आप सब का मुझे झेलते रहने का आभार प्रकट करना चाहुंगा! जिन्होंने मुझे "टिप्पणी ब्रांड" उत्साहवर्धक टोनिक की दो बूँद दी है, उन्हें मै बताना चाहूँगा के उनका ये प्रयोग सौ फीसदी सफल रहा! हर एक बूँद मेरे लहू में मिल जो रासायनिक क्रिया कर रही है उस
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अजीब दास्ताँ है ये.......(2 )(हास्य-वयंग्य)

सर्वप्रथम तो आप सब का मुझे झेलते रहने का आभार प्रकट करना चाहुंगा!जिन्होंने मुझे "टिप्पणी ब्रांड" उत्साहवर्धक टोनिक की दो बूँद दी है,उन्हें मै बताना चाहूँगा के उनका ये प्रयोग सौ फीसदी सफल रहा!हर एक बूँद मेरे लहू में मिल जो रासायनिक क्रिया कर रही
 
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अजीब दास्ताँ है ये...(हास्य-वयंग्य)

राम राम जी!जीवन भी कई बार अजीब परिस्थितियों से दो-चार करवा देता है!और हर किसी को!मुझे तो ऐसा ही लगता है!अब कुंवर जी को ही लो,फंस गए बेचारे ऐसी ही परिस्थिति में!मजे कि बात ये कि अपने ही घर में!पौह का महीना हो तो बताने कि
 
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डॉक्टर साहब(हास्य-वयंग्य)

बात उन दिनों की है जब कुंवर जी अपना 3 वर्षीय अभियांत्रिकी का उपाधि-पत्र  प्राप्त करने के पश्चात भी गाँव में ही समय व्यतीत कर रहे थे!कुछ दिन नौकरी भी कर ली थी,छूट गयी थी किन्ही कारणों से!तब तक स्नातक भी हो चुके थे
 
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शाम कि सैर...(हास्य-वयंग्य)

दो विद्वान पुरुष शाम की  सैर पर निकल पड़े!विद्वान् इसलिए कह रहा हूँ क्योंकि वो दोनों कुछ देर बाद ही पूरी मानवजाति के समक्ष एक ऐसा उदाहरण प्रस्तुत करने वाले थो जो आज कि मानव-मानसिकता पर एक-दम फिट बैठता है!संध्या समय,सूरज दिन-भर कि थकान
 
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