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मै समझ नहीं पा रहा हूँ कि मै कैसे पूछूं!(वयंग्य)

मै समझ नहीं पा रहा हूँ कि मै  कैसे पूछूं!क्या वर्ण वयस्था उचित थी या है या हो सकती है?उस हिसाब से चार वर्ण-एक पंडित जो ज्ञान बांटता है,एक क्षत्रिय-जो अपनी जान की भी परवाह नहीं करता दूसरो की रक्षा करने में,एक वैश्य-जो सभी के लिए 'अर्थ' को सही अर्थो
 
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ब्लॉग-जगत की शान,आतंकवादी भाई जान,सलीम खान से एक छोटा सवाल अपना भी!पता नहीं वो बताएँगे या नहीं!मर्जी है उनकी आखिर नियत है उनकी!-कुंवर जी,

मै पिछले कई दिनों से अपने आप को इस विषय से बचाए हुए था!पर मन चंचल आखिर चंचलता दिखा ही गया!आतंकवादी भाई जान,मुस्लिम जगत की शान,सलीम खान का प्रेम मुझे खींच ही लाया दुबारा से इस खेल में!हालांकि वो भरे-पूरे मस्तिष्क के स्वामी है,इस पर किसी को भी कोई भी
 
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संवेदना दिखाने को संवेदनहीन होते लोग,(कविता), (वयंग्य)

संवेदना दिखाने को संवेदनहीन होते लोग,दुसरो को जगाने के लिए अपने होश खोते लोग!हाँ मै अभी जिन्दा हूँ,बस यही बताने के लिएजिंदगी को ढोते लोग!ओरो की नींद उड़ा,खुद चैन से सोने के सपने संजोते लोग!भगवान् ने इंसान बनायवो ही अबहिन्दू-मुस्लिम होते लोग!हथियार उठा जो
 
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आज आदमी की सोच इतनी बीमार क्यों है?(कविता), (वयंग्य)

कल जब आदरणीय गोदियाल जी की ये कविता वयंग्य  पढ़ी!तो शब्दों को तो जैसे कोई पगडण्डी मिल गयी हो!बढ़ चले उस ओर ही!राह में जितने भी "क्यों" मिले सब को एकत्रित कर ले आये मेरे पास!अब मुझ अज्ञानी के पास इनके उत्तर है नहीं!शायद आप के पास हो,यही सोच कर इन्हें
 
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पलके जो गीली है,उन ही आँखों में ये अंगार क्यों है?वयंग्य)

कल ही आदरणीय गोदियाल जी के वयंग्य कविता पढ़ी!शब्दों को तो जैसे कोई पगडण्डी मिल गयी हो!बढ़ चले उस ओर ही!राह में जितने भी "क्यों" मिले सब को एकत्रित कर ले आये मेरे पास!अब मुझ अज्ञानी के पास
 
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देखना एक बार क्या ये सच्ची बात है?(वयंग्य),

देखना एक बार ये आँखों की चमक ये हाथो की पकड़ये होंठो पर मुस्कानक्या सच्ची बात है!या फिरमहज़ औपचारिकताओं की करामात है!ये फोटो अभी कुछ दिन पहले दैनिक  जागरण  में  छपा  था!देख कर कुछ अटपटा सा तो लगा,पर सोचा काश ये सब
 
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अरे हिन्दू होगा!(वयंग्य),

राम राम जी,,,मेरी पिछली कविता ने मेरे मन में कई प्रशन खड़े कर दिए!एक तो यही कि आखिर ये हिन्दू कौन है भई?  ये हिन्दू कौन है भई?पहले  जो वयांख्या थी,पहले थी!अब तो जो बेचारा सा लगे,भाइयो में भी न्यारा से लगे,एक समर्थ मजबूर जो है,वही हिन्दू है!आज जो
 
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करनाल कोर्ट का एक एतिहासिक फैसला (एक विचार....)(वयंग्य),

कल करनाल कोर्ट में एक एतिहासिक फैसला सुनाया गया!खबर के लिए लिंक दे दिया गया है!पाँच अभियुक्तों को फांसी कि सजा एक साथ सुनाया जाना अपने आप में एक मिसाल है!कहाँ तो भारत में फांसी कि सजा को ही ख़त्म करने पर विचार चल रहा है और कहा  एक साथ पाँच-पाँच
 
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जरुरी तो कुछ भी नहीं.......(कविता), (वयंग्य),

माना शिवाजी,महाराणा,भगत सिंह ये पुराने जमाने की बात है,पर देख ज़रा उन के आगे तेरी क्या औकात है!जरुरी नहीं के सारे के सारे "रंग दे बसंती" वाला सीन पैदा करें!ये भी जरुरी नहीं के सारे के सारे "अ वेडनसडे" जैसा भी कुछ करें!जरुरी तो कुछ भी नहीं,जो हम करते
 
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दुःख...(वयंग्य)

मित्र!एक ऐसा शब्द है जो पूर्णता देता है हमे!या यूं कहिये कि सम्पूर्णता देता है हमे,यदि 'मित्र' शब्दों से बहार है तो!मै आज थोडा सा गंभीर सा हो गया हूँ,अपने एक मित्र को  धोखा देते हूए देख कर!अभी एक फिल्म देखी थी '३ idiots'!उसमे अभिनेता
 
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