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खामोशियों की जुबाँ समझे तो मायने बदल जाते है बातो के.....(कुंवर जी)

खामोशियों की जुबाँ समझेतो मायने बदल जाते है बातो के,असमंजस में है कि बातों के मायने बदलेया बात पुरानी रहने दे....जिस्मानी जुबाँ का अंदाज-ए-बयाँ तोकुछ और ही अफसाना कह रहा,अच्छा लगे तो मान ले वरनाअफसानात रूहानी रहने दे,हौंसले अपने तो पस्त
 
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तुझको मजबूर समझ मै लौट आया.....

मै कल तेरे दरवाजे तक गयाऔर लौट आया,अन्दर जाना जी ने बहुत चाहापर मै लौट आया,मन ही मन तेरा दर खटखटायाऔर मै लौट आया,लगा मुझे ऐसा किदेख लिया है तुमने मुझे कहीं से,तुमको भी अनदेखा कर मै लौट आया,कुछ तो रह गया था मेरा वही पर,उसे वहीँ छोड़ कर मै लौट आया,मै
 
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कमी अपनों की खलती ही है!-(कविता)

रातो में,बातो में,कभी खयालो मेंकभी हालातो में,कभी जोश में कभी जज्बातों में,किसी से बिछुड़ने पर किसी की मुलाकातों में,मौत के हमले में,कभी जिंदगी की घातों में,बोझ होते रिश्तों मेंकहीं नए जुड़ते नातों में...कमी अपनों की खलती ही है! जय हिन्द जय
 
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ना तो लेखनी में समर्पण है,ना सही है कभी आह कोई,क्या लिख पाऊंगा मै,खुद के लिए,औरो के लिए!(एक विचार...., )

ना तो लेखनी में समर्पण है,ना सही है कभी आह कोई,क्या लिख पाऊंगा मै,खुद के लिए,औरो के लिए!बहा चला गया हर बार बहाव के साथ मै,बह गया गया कभी भाव के साथ,खींच-तान रही जारी सदा लगाव के साथ,रहा लुटता हर बार चुनाव के साथ!क्या उलझन ही जीवन है,या पकड़ ली है गलत
 
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