“हृदय से नमन है हमारा” (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री “मयंक”)
धरा है तुम्हारी, गगन है तुम्हारा! तुम्हें प्यार करता है, संसार सारा!! तुम्हारी चमक से चमकता है सूरज, तुम्हारी दमक से दमकता है चन्दा। तुम्ही दे रहे हो निबल को सहारा! तुम्हें प्यार करता है, संसार सारा!! तुम्हारी चहक से ही चलता पवन है, तुम्हारी महक से ही
May 26 2010 07:02 PM



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