हिंदी सिनेमा के शराबी गीत (अंतिम ) राजेश खन्ना के अभिनय के बारे में लोगों के ख्याल अलग -अलग हो सकते हैं मग़र जिस किस्म के गीत उन्हेंमिले वो किसी भी और कमर्शियल हिंदी हीरो के लिए जलन का बायस रहे हैं । बहरहाल , किसी के जले पे नमकछिडके बिना गाना सुनना बेहतर
आज दिल बड़ा ही फ़िल्मी हो रहा है, शायद इसलिए भी की पिछले 3 -4 दिनों से कई फिल्मे देख चुका हूँ..वैसे मैं बता दूँ की नयी फ़िल्में तो मुझे पसंद है ही लेकिन पुरानी हिंदी फिल्मो का मैं बेहद शौक़ीन हूँ, और उसमे भी अगर राजेंद्र कुमार-साधना की कोई फिल्म हो तो
मुझे इस फिल्म का इंतज़ार था . फ़िल्में एक से एक बढ़ कर बनती रहती हैं मगर दिबाकर बनर्जी की कोई भीफिल्म इन तमाम फिल्मों से एक मायने में मेरे लिए ख़ास होती है . दरअस्ल, दिल्ली के एक ख़ास कमीने तबके को पकड़ पाने की जो आँख दिबाकर के पास है वो दिल्ली-६ बनाने वाले
1992 में आई रोँ फ्रिक की ये फिल्म कोई कहानी बयान नहीं करती और ना ही इसमें कोई संवाद हैं । २४ देशों की १५२ लोकेशंस पर शूट की गयी इस फिल्म को बनाने में कई साल लगे । अरबी ज़ुबान में 'बराका' का मतलब है 'आशीर्वाद ' । धरती और जीवन प्रकृति के आशीर्वाद हैं और
मयकशों को याद होगा के खाकसार ने हाल ही में एक अनदेखी-अनजानी फ़िल्म 'वैली ऑव फ्लार्ज़ ' का ज़िक्र यहाँ किया था और उसका एक ट्रेलर भी लगाया था । दरस्ल फिल्म में नसीर सा'ब की मौजूदगी से ये गुमान था के अच्छी ही होनी चाहिए पिक्चर, मग़र वो पोस्ट पढ़ के फिल्म देख