दुआ है कि तुम्हें तुम जैसे अजीब लोग मिलें!
खलील जिब्रान कहता है कि ‘हम अपनी खुशियाँ और ग़म अनुभव करने के बहुत पहले ही उनका चुनाव कर चुकते हैं!’ ऐसा लगता नहीं की यूँ मैने किया हो लेकिन शायद ऐसा होता हो या इस सत्य का भावार्थ अनुभव करना बाकी हो! हाँ, हर प्रेम करने वाले ने इस बात का चुनाव ज़रूर किया
May 21 2010 01:20 AM



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