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तेरा ना होना

आज इक बार फिर तेरा ना होना नागवार गुजरा है. वीरानी शाम में आशिक हवाओं ने मुझे बदनाम समझा है. पुराने जख्म अब पककर,मलहम से हाथ चाहेंगे. सनम आ जाए महफ़िल में ,दुआं दिन रात मांगेंगे. अभी इक दर्द का लश्कर सीने के पर उतरा है….   कहूँ साजिश सितार