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प्रतिबिम्ब

अकेलेपन के साए सच लगते हैं इस अंधेर कमरे में कुछ ढूँढता एक कदम लम्बे रास्ते चले थे एक, निकले कई थामे वक़्त का हाथ दूर निकल आये अरसा लगता है पल-पल पिछड़े मोड़ पर थमे थे न मूड़ सके हम, रुके कई यह कैसी है जंजीरें पैरों में लिए फिरते है सीने से लगाये [...]
 
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Praan प्राण প্রান

Performed by Matt Harding. Music by Gary Schyman. Sung by Palbasha Siddique. Penned by Rabindrnath Tagore. Published in his Nobel award winning book of Bengali poetry, Gitanjali, in 1910. It took 100 years to understand this poetry and make others
 
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कटाक्ष Sarcasm

आधुनिक युग का भारतीय एक झुण्ड के आचरण या व्यवहार को सभ्यता कहते हैं | सभ्यता के शुरुआत में स्त्री-पुरुष की भूमिका (लिंग भूमिका) को परिभाषित किया गया था और स्त्री-पुरुष के कार्यों को प्रस्तावित कर, एक झुण्ड को समाज की संज्ञा दी गयी थी| जब यह
 
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अंतरिम

क्या है, क्यों है, कैसे है सोचता था जब पाया तो बहुत खुश हुआ उसके बाद क्या ? पाया, वो मिल गया अब कहाँ, किधर, किसको ढूँढना, चाहत, प्यास, होड़, जिद्द -लक्ष्य के अनेक रूप है पर मैंने एक नया रूप पाया -अलक्ष्य से लक्ष्य का लक्ष्य शून्य ! अंतरिम, मध्यांतर,
 
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