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ज़मीन....

ना जाने कितनी उड़ाने भरकर...नर्म हाथों से सख्त पैरों सेखोद डाला है आसमां सारा...शायद इसमें ज़मीन हो मेरी....
 
Dankiya
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साहित्य की ‘ज़मीन’

पत्रिका: ज़मीन, अंक: 25, स्वरूप: त्रैमासिक, संपादक: अमिताभ मिश्र व चन्द्रशेखर साक्कले, पृष्ठ: 54, मूल्य 25 रू.(वार्षिकः 100रू.), ई मेल: उपलब्ध नहीं, वेबसाईट: उपलब्ध नहीं, फोन/मो. (00)000000, सम्पर्क: ई-1, सरस्वती नगर, सिचाई कालोनी, भोपाल 462003 म.प्र.
 
अखिलेश शुक्ल
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न हमारी आग का रंग बदलेगा – महेन्द्र नेह

न हमारी आग का रंग बदलेगा – महेन्द्र नेह ( a kavita poster by ravi kumar, rawatbhata) शब्दों के कुछ समूह हमारी चेतना पर अचानक एक हथौडे़ की तरह पड़ते हैं, और हमें बुरी तरहझिंझोड़ डालते हैं. दरअसल हथौडे़ की तरह पड़ने और बुरी तरह झिंझोड़ डालने वाली
 
रवि कुमार, रावतभाटा