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ग़ज़ल: वक्त

Shareबेवफ़ाई पे जब भी आता हैवक्त तेरी तरह मुस्कराता हैमेरे पर काटना वही चाहेगाउड़ना जो अभी सिखाता हैबातें करना उसे पसंद नहींख़ामोश रहो तो रूठ जाता हैसिखाता बातों की है बाज़ीगरीवादे करके मुकर वो जाता हैमेरी उम्र के सभी सफे लेकरखुद लिखता है खुद मिटाता
 
अशोक जमनानी
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ग़ज़ल: दोस्त

 सुना है मेरा दिल दुखाएगा दोस्त है दोस्ती निभाएगावो आंखों में शर्म रखता है सिर झुकाकर ही कतराएगाभीड़ में वो एहसान कर देगानज़रें मिलीं; तो मुस्कराएगादर्द का मेरा जब सफ़र होगाअलविदा कहने ही वो आएगायाद रखना वो कहेगा मुझेऔर वो मुझको भूल
 
अशोक जमनानी