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कानपुर में होली की मस्ती

कानपुर में होली का अपना अलग ही इतिहास है। यहाँ अवस्थित जाजमऊ और उससे लगे बारह गाँवों में पाँच दिन बाद होली खेली जाती है। बताया जाता है कि कुतुबुद्दीन ऐबक की हुकुमत के दौरान ईरान के शहर जंजान के शहर काजी सिराजुद्दीन के शिष्यों के जाजमऊ पहुँचने पर तत्कालीन
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मुला चिट्ठाचर्चा से इसका कउनौ रिलेशन नहिं है

एक्ठो रहें बड़े ओहदे वाले बड़का ब्लॉगर.. सो डिस्केशन डिस्केशन में उनका डिलेवर भी ब्लॉग-श्लॉग लिख लेने लगा रहा । उनकी काम वाली बाई भी कुछ कविताई की बेहयाई कर लेती रही, सो  वहू  ब्लॉगर को पकड़... -९९९- पूरा आलेख मूल ब्लॉगपृष्ठ पर पढ़ने हेतु शीर्षक पर
 
डा. अमर कुमार
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माडरेशन की प्रतीक्षा में

इस पहेली को हल करने के प्रयास में मुझे एक घटना याद आ गयी, दो दोस्त आपस में उलझे हुये थे, शायद उन्हें कुछ लगी हुई थी । पहले ने कहा, " अगर मैं चाहूँ तो, तुम्हारे ऊपर पेशाब भी कर दूँ और तू... -९९९- पूरा आलेख मूल ब्लॉगपृष्ठ पर पढ़ने हेतु शीर्षक पर क्लिक
 
डा. अमर कुमार
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ग़र होश जरा सा अब तक है फ़ाग़ी.. होश तू अपना तौल !

लगा कि ये साल वी सुक्खा-सुखियाँ ही निकल जाने को है, पर वह न हुआ । अपना आज कुछ ऎसा डौल लग गया कि, लगदा है आज सब बेडौल ही लिक्खा जावेगा । ऒऎ कोई नहीं, वो तो जैसे ही सन्दीप ने एक ठोका, यो लाग्या कि अब... -९९९- पूरा आलेख मूल ब्लॉगपृष्ठ पर पढ़ने हेतु शीर्षक पर
 
डा. अमर कुमार
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चलो, मेरा लिखा मत पढ़ो, पर इसको तो न छोड़ो

जब कौल कर ही लिया है, तो मैं आज कुछ न लिखूँगा.. तो आप भी कुछ न पढ़ना । आपको ब्लागवाणी पर यह ज़ब्बर टाइप शीर्षक दिखला कर यूँ ही फुसला कर बुला लूँ, और यहाँ एक वाह-वाह आलेख पकड़ा दूँ… यह ... -९९९- पूरा आलेख मूल ब्लॉगपृष्ठ पर पढ़ने हेतु शीर्षक पर
 
डा. अमर कुमार
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होरी औ कम्पूटर बाबा !

होरी कै सबका मुबारकबाद !होरी तो हर साल की तरा आई है,मुदा अबकी हम स्वाचा कि होरी अपने कम्पूटर बाबा के साथै मनाइ । एकु दिन पहिलेहेते हम फेसबुक,ट्विटर और ब्लागवा मा धंसि गैन। जहाँ-तहां हम भकुअन कि तरा घूमित रहेन मुदा हमका कउनो रसिया न मिली जहिते हम फागुन की
 
संतोष त्रिवेदी ♣ SANTOSH TRIVEDI
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कैसे मनी आपकी होली

होली की खुमारी अब भी सभी में बाकी होगी। लेकिन क्या करें हमें तो काम पर जाना है। अब हम कोई सरकारी मुलाजिम तो हैं नहीं कि छुट्टी मिल जाएगी। हम ठहरे एक छोटे से पत्रकार, सो प्रेस जाकर खबरें तो बनानी ही पड़ेंगी। और इसके पहले हमें 10.30 बजे की मिटिंग में भी
 
राजकुमार ग्वालानी
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ऐसे खेली होली!

शुरुआत बहुत धीमी थी. बेहद शालीन. इंटरकॉम पर एक-दो फोन होली की बधाई देते हुए. यानी सोसायटी के भीतर से ही. मोबाइल कल रात से ही बरबरा रहा था. लगातार मैसेज पर मैसेज. होली की बधाई पर बधाई. सारे मित्रों को बहुत धन्यवाद. ये जानते हुए भी कि टेलीकॉम प्रोवाइडर खून
 
अखिलेश शर्मा
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जब फागुन रंग झमकते हों

                                                                      
 
vimal verma
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बरसाने की लट्ठमार होली

होली की रंगत बरसाने की लट्ठमार होली के बिना अधूरी ही कही जायेगी। कृष्ण-लीला भूमि होने के कारण फाल्गुन शुक्ल नवमी को ब्रज में बरसाने की लट्ठमार होली का अपना अलग ही महत्व है। इस दिन नन्दगाँव के कृष्णसखा ‘हुरिहारे’ बरसाने में होली खेलने आते हैं, जहाँ राधा
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रंग – कविता – रवि कुमार

रंग (a poem by ravi kumar, rawatabhata) रंग बहुत महत्वपूर्ण होते हैं इसलिए भी कि हम उनमें ज़्यादा फ़र्क कर पाते हैं कहते हैं पशुओं को रंग महसूस नहीं हो पाते गोया रंगों से सरोबार होना शायद ज़्यादा आदमी होना है यह समझ गहरे से पैबस्त है दिमाग़ों में तभी तो यह
 
रवि कुमार, रावतभाटा
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मुँह में भांग की गोली है.. भीगी हर इक चोली है..(बुरा ना मानो होली है.. पोल तुम्हारी खोली है पार्ट-२)---->>>दीपक 'मशाल'

दोस्तों घबराइए नहीं मैं वापस आ गया हूँ और कल जो वादा कर के गया था वो भी मुझे बहुत अच्छी तरह से याद है... आपको क्या लगता है??? आप सबकी इज्ज़त के चीथड़े उधेड़े तो बाकी लोगों के छोड़ दूंगा.. नहीं साहब बिलकुल नहीं.. देखिये अब बाकी लोगों की बारी है
 
दीपक 'मशाल'
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एक तो इतवार ऊपर से होली ... आज तो बस टिपियाओ पोस्ट पढ़ने को मारो गोली

वैसे ही सप्ताहान्त अर्थात् शनिवार और इतवार को लोग ब्लोग्स में कम ही जाते हैं। फिर आज तो इतवार के साथ ही साथ होलिकादहन भी है। याने कि करेला वो भी नीमचढ़ा! आज के दिन भला पोस्ट कौन पढ़ता है? आज तो बस टिपिया टिपया कर शुभकामनाएँ देने का दिन है।भाई, सप्ताह में
 
जी.के. अवधिया
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बुरा न मानो होली है - सब मोनालिसाऍं भोली हैं

बुरा न मानो होली है - मेरी बातें भोली हैं - सब अपने हमजोली हैं !पहचान कौन ?
 
अर्कजेश
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होली है भाई होली है

सभी को होली के हर्ष एवम उल्लास के पर्व  की हार्दिक शुभकामनाएँ 
 
डॉ महेश सिन्हा
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गुलाल ऎसे लगाते हैं

होली पर विशेषहोली का दिन था । लाल बहादुर शास्त्री जी के निवास पर होली मनाने के लिए अनेक लोग आए थे।सब ओर प्रसन्नता का माहौल था । शास्त्री जी सभी से बडे़ स्नेह से मिल रहे थे। इस भीड़-भाड़ से कुछ दूर एक कोने में उनका जमादार भी हाथ में गुलाल लिए खडा़ था पर आगे
 
दिनेश शर्मा
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होली मुबारक

वर्तमान हालात कुछ ऎसे प्रतीत होते हैं -होलिका नहीं' बस ' जल रहीरंग जैसा बरसे पैट्रोलआग लगी है तन-मन मेंकैसे हो कंट्रोल ॥लेकिन कहते हैं अच्छा सोचना चाहिए-होली के शुभ अवसर पर आपको हार्दिक शुभकामनाएं ।
 
दिनेश शर्मा
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बुरा न मानो होली है...

अभी अभी ख़बर मिली है कि अगला नोबेल शांति पुरस्कार अमिताभ बच्चन को देने का फैसला किया गया है, इसके तुरंत बाद मिस्टर बच्चन ने घोषणा की है कि वो पाकिस्तान की एक फिल्म में लीड रोल करेगें। इस फिल्म का मुहूर्त शाट में ओबामा, मनमोहन सिंह, जरदारी होंगे। शांति और
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दो सौ साल से जली ही नहीं होली

पूरे देश में एक तरफ जहां होली की उमंग का माहौल है, ऐसे में छत्तीसगढ़ में रायपुर जिले के छुरा विकासखंड में तीन गांव ऐसे हैं जहां पर होली को लेकर किसी में कोई उत्साह ही नहीं है। इन गांवों में पिछले दो शताब्दी से होलिका दहन ही नहीं हुआ है। यहां के ग्रामीण
 
राजकुमार ग्वालानी
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होली की यादें- साहित्यकारों के बिखरे रंग -पुष्पा भारती

         (पुष्पा भारती)                होली का नाम सुनते ही यादों के घोर धुर बचपन के दिनों से जा जुड़ते हैं। '7-8 साल' की रही होऊँगी यानि 'सन 1942-43' के समय मेरे माता-पिता लखनऊ में रहते
 
जगदीश्‍वर चतुर्वेदी
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विविधता में एकता की प्रतीक : होली

होली को लेकर देश के विभिन्न अंचलों में तमाम मान्यतायें हैं और शायद यही विविधता में एकता की भारतीय संस्कृति का परिचायक भी है। उत्तर पूर्व भारत में होलिका दहन को भगवान कृष्ण द्वारा राक्षसी पूतना के वध दिवस से जोड़कर पूतना दहन के रूप में मनाया जाता है तो
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आओ रंग ले हम तन-मन

आओ रंग ले हम तन-मन,रंग-रंगीली होली के संग में.भूल कर भूत की भूलो को,मिल ले गले आज सभी संग में..ऐसा जीवंत कोई पर्व नही,दुनिया जहांन में.धन्य मानो अपने जीवन को-कि तुम पैदा हुए हिन्दुस्थान में ..भूल भाषा, धर्म, जाती,-क्षेत्र ओर समाज के सवाल को .टूटे दिलो को
 
HEY PRABHU YEH TERA PATH
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'बुरा ना मानो होली है.. पोल तुम्हारी खोली है' - part-1----- दीपक 'मशाल'

आज की रात.. होना है जो.. वो होने दो...    अरे नहीं नहीं भाई, रात को कुछ नहीं होने वाला.. वो तो असल में आज ज़रा मस्ती के मूड में आ गया हूँ..  अब आप सोचेंगे ये गंभीर ब्लोगिंग की बातें चिल्लाने वाला अचानक अपने उसूल कैसे भूल बैठा???तो
 
दीपक 'मशाल'
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आपके दिल में

आपके दिल में थोडा सा प्यार चाहिए राम ओर रहीम के लिए – श्याम ओर सलीम के लिए आपके दिल में थोड़ी सी सद्भावना चाहिए ईद ओर होली के लिए – यूं हंसी ठिठोली के लिए आपके दिल में थोडा -सा जज्बा चाहिए इबादत ओर पूजा के लिए -व्रत ओर रोज़ा के लिए आपके दिल
 
अफ़लातून
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बच्चों के उत्पात से आरंभ हुआ होलिका-दहन का

होलिका-दहन पीछे कई मान्यताएं हैं. उनमें से एक यह भी है. भविष्य पुराण में वर्णन आता है कि राजा रघु के राज्य में धुंधि नामक राक्षसी को भगवान शिव द्वारा वरदान प्राप्त था कि उसकी मृत्यु न ही देवताओं, न ही मनुष्यों, न ही हथियारों, न ही सदी-गर्मी-बरसात से
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हस्तिनापुर में होली (हास्य-व्यंग्य, कार्टून)

– हैप्पी होली अंकल-आंटी और गुरू द्रोण की क्लास खत्म होते ही सभी राजकुमारों के हाथों में उनकी फाउंटेन पेन चमकने लगी । कुछ ही देर मे सभी की सफेद युनीफार्मों पर नीले रंग की चित्रकारी झलकने लगी थी । ”अरे क्या कर रहे हो । कुन्ती माँ डांटेगी । सारी
 
K M Mishra
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यूँ आरंभ हुआ होलिका-दहन व होली

होली भारतीय समाज का एक प्रमुख त्यौहार है, जिसका लोग बेसब्री के साथ इंतजार करते हैं। भारत के विभिन्न क्षेत्रों में अलग-अलग रूपों में होली मनाई जाती है। रबी की फसल की कटाई के बाद वसन्त पर्व में मादकता के अनुभवों के बीच मनाया जाने वाला यह पर्व उत्साह और
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जब याद आती है वो होली

जब भी आती है रंग-बिरंगी होलीहमें याद आती है एक सूरत भोली।।थी जो कभी हमारी हमजोलीएक गांव की वो प्यारी गोरी।।दिल कर गई थी जो हमारा चोरीचहकते हुए थी वो हमसे बोली।।याद रखना ये पहली होलीजो तुमने हम संग है खेली।।भूल न जाना गुलाल की हथेलीप्यारी-प्यारी ये हमारी
 
राजकुमार ग्वालानी
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यह वर्ष बेमिसाल है होली मनाइये

यह वर्ष बेमिसाल है होली मनाइयेहर शखस फटेहाल है होली मनाइयेमनमोहनी हॅंसी ने रुला करके रख दियासौ रुपये में दाल है होली मनाइयेकुर्सी महल पवार के हिस्से में दोस्तोंअपने लिए पुआल है होली मनाइयेघर में नहीं है चीनी तो गुझिया न खाइयेअफसर के घर में माल है होली
 
जयकृष्ण राय तुषार
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मसक गई अंगिया, सरक गई सारी

अजय शुक्‍ला फागुन भर फगुनाहट हवा के साथ-साथ फरफराती है। और, होली के दिन सूरज की लाली में भी अलग ही सुरूर होता है। कोई भंग पिये न पिये, इक सलोनी सी सिहरन और नशा सा हर शय पर सवार रहता है …फागुनी बयार का नशा। और अगर कहीं थोड़ी सी भंग पी ली तो कहना ही
 
अजय शुक्‍ला
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मेरा खुला पत्र योगेश समदर्शी के नाम

समदर्शी जी नमस्कार…. ये खुला पत्र मैँ आपको इसलिए नहीं लिख रहा हूँ कि मेरे पास लिफाफा खरीदने के लिए खुले पैसे नहीं हैँ। एक्चुअली क्या है कि मेरे पास लिफाफे को बन्द करने लायक ज़रूरी गोंद नहीं थी तो मैँने सोचा कि…….अब आप कहेंगे कि गोंद
 
राजीव् तनेजा
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महंगाई और होली

महंगाई के रंग ने कपड़े डालें फाड़ बची लंगोटी छिपाई इज्ज़त पर बोली महंगाई कहाँ भागते हो भाई मेरी नज़र है तुम्हारी लंगोटी पर अगली होली फ़िर आऊंगा इसको भी उतार कर ले जाऊंगा
 
suraj khanna
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होली

होलीअब तो मोहन तुम बिन, कुछ नहीं सुहाता,होली ही नहीं कोई, उत्सव नहीं भाता,आतंकी ख़ून की होली, रोज़ ही खेलें,बेगुनाह लोगों की, जां ही ले लें,सरकार मूक होकर, तमाशा देखती है, हत्याओं पर लगाम लगे, ये न सोचती है,बिगड़ा रईस अबला के साथ, होली मनाता है,गंगा मैली
 
SURINDER RATTI
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जब फागुन रंग झमकते हों / और दफ़ के शोर खड़कते हों /देख बहारें होली की—होली की सतरंगी शुभकामनाएं

मस्‍ती, उल्‍लास, रंग-गुलाल, मिलना, रंगों से सरोबार, पकौड़े, दही-बड़े, होली की मस्‍ती में सतरंगी शुभकामनाएं और आइये गायें नजीर अकबराबादी की यह रचना। (एमटीएनएल की कृपा से बहुत दिनों बाद ब्‍लॉग पर आना हुआ है। बहरहाल शुक्र है कि कम से कम होली पर नेट चल र
 
Kapil
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होली है!! (डा0 रूपचन्द्र शास्त्री मयंक)

प्रेम-प्रीत और मस्ती की बोली है! बुरा न मानो रंगों की होली है!!
 
डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
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पंगेबाज अपने गुरू के साथ पाए गए.

रहस्य खुल ही गया, कौन है पंगेबाज का गुरू और कहाँ से आते है पंगों के आइडियाज....रंगे हाथों पकड़े गए...अरे भाई होली खेलेंगे तो हाथ तो रंगे हुए ही होंगे ना....
 
संजय बेंगाणी
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होली मुबारक

होली की बधाइयाँ
 
अशोक कुमार पाण्डेय
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