पसंद करें
2
नापसंद करें

हुआ क्या जो रात हुई

हुआ क्या जो रात हुई, नई कौन सी बात हुई दिन को ले गई सुख की आँधी, दुखों की बरसात हुई पर क्या दुख केवल दुख है, बरसात भी तो अनुपम सुख है बढ़ जाती है गरिमा दुख की, जब सुख की चलती है आँधी पर क्या बरसात के आने पर, कहीं टिक पाती है आँधी आँधी एक हवा का झोंका
 
सीमा सचदेव