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संत कबीर के दोहे-मोल लिया ईश्वर बोलता नहीं (parmatma ka mahatva-kabir ke dohe)

मूरति धरि धंधा रखा, पाहन का जगदीशमोल लिया बोलै नहीं, खोटा विसवा बीससंत शिरोमणि कबीरदास जी कहते हैं कि लोग मूर्ति का भगवान बनाकर उसकी सेवा करने के बहाने अपना धंधा करते हैं, पर वह मोल लिया ईश्वर बोलता नहीं है इसलिये नकली है।वर्तमान संदर्भ में व्याख्या
 
दीपक भारतदीप
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रहीम दर्शन-नदी के तट को पार करने वाला पानी व्यर्थ चला जाता है (rahim ke dohe-nadi aur pani)

जो मरजाद चली सदा, सोई तो ठहरायजो जल उमगै पारतें, कहे रहीम बहि जाय कविवर रहीम कहते हैं कि जो सदा से मर्यादा चली आती है, वही स्थिर रहती है। जो पानी नदी के तट को पार करके जाता है वह बेकार हो जाता है। जो बड़ेन को लघु कहें, नहिं रहीम घटि जाहिंगिरधर मुरलीधर
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जब एक हिन्दू माँ अपने बच्चे को नमाज़ के समय मस्जिद भेज देती...( भाग-एक )

मेरे पैतृक घर के  पास , करीब पचास मीटर की दूरी पर एक मस्जिद है...    मेरे घर और मस्जिद के बीच एक स्कूल और एक  मुस्लिम परिवार का घर है  बस.....   बचपन में , खास कर गर्मी के दिनों में हमलोगों  की नींद अजान से ही
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बिडाल वृत्ति

धर्मघ्वजी सदा लुब्धश्छाद्यिको लोकदम्भका।बैडालवृत्ति को ज्ञेयो हिस्त्रः सर्वाभिसन्धकः।।हिंदी में भावार्थ-अपनी कीर्ति पाने की इच्छा पूर्ति करने के लिये झूठ का आचरण करने वाला, दूसरे के धन कर हरण करने वाला, ढौंग रचने वाला, हिंसक प्रवृत्ति वाला तथा सदैव
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मनु संदेश-नाम पाने के लिये ढोंग करने वाले ‘बिडाल’ (manu darsha sandesh in hindi)

धर्मघ्वजी सदा लुब्धश्छाद्यिको लोकदम्भका।बैडालवृत्ति को ज्ञेयो हिस्त्रः सर्वाभिसन्धकः।।हिंदी में भावार्थ-अपनी कीर्ति पाने की इच्छा पूर्ति करने के लिये झूठ का आचरण करने वाला, दूसरे के धरन कर हरण करने वाला, ढौंग रचने वाला, हिंसक प्रवृत्ति वाला तथा सदैव
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रंगीला रसूल भेज दूँ, छापोगे क्या?

क़रीब तीन साल पहले जब ब्लौग जगत के कुछ उत्साही सेकुलरपंथियों ने हिन्दू धर्म के देवी-देवताओं की मर्यादा का अतिक्रमण करती कुछ पोस्टें चढ़ाई थीं तो धुरविरोधी* ने पूछा था : “रंगीला रसूल भेज दूँ, छापोगे क्या?”एम एफ़ हुसैन साहिब को लेकर जो बहस छिड़ी हुई है,
 
अभय तिवारी
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पिण्डदान की भूमि

माना जाता है कि ज्ञान की नगरी 'गया' मानव जाति के लिए अपने पूर्वजों के ऋण से उऋण होने के लिए अध्यात्मिक स्थल है तभी तो पिण्डदान के लिए देवगण भी इसे सर्वोतम जगह मानते है। यही कारण है कि दशरथ नन्दन श्रीराम के द्वारा फल्गु नदी के तट (गया) पर पिण्दान करने की
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पशु बलि विरोधियों का पाखंड

गढ़ीमाई, कामख्या या शाक्त मंदिरों में होने वाली पशुबलि पर छाती पीटने वाले ये पशुप्रेमी बकरीद पर अपने होंठ क्यों सिल लेते हैं। तब उनकी जीभ पर ताला क्यों लग जाता है? इस प्रश्न का उत्तर वे नहीं देते। क्योंकि वे जानते हैं कि इसके विरोध पर उनकी जान ही खतरे में
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संत कबीरदास के दोहे-हिन्दू कहें राम प्यारा, तुर्क कहें रहीम (ram rahim-kabir ke dohe in hindi)

कहै हिन्दु मोहि राम पिआरा, तुरक कहे रहिमाना। आपस में दोऊ लरि-लरि मुए, मरम न कोऊ जाना।। संत शिरोमणि कबीरदास अपने समय के धार्मिक विवादों की तरफ इशारा करते हुए कहते हैं कि एक तरफ भारतीय हैं जो कहते हैं कि हमें राम प्यारा है दूसरी तरफ तुर्क हैं जो कहते ह
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चाणक्य नीति-शील स्वभाव हो तो कुरूपता कौन देखता है (shital savbhaav- chankya niti in hindi)

दरिद्रता श्रीरतया विराजते कुवस्त्रता शुभ्रतया विराजते। कदन्नता चोष्णतया विराजते कुरूपता शीतया विराजते।। हिंदी में भावार्थ- अगर मनुष्य में धीरज हो तो गरीबी की पीड़ा नहीं होती। घटिया वस्त्र धोया जाये तो वह भी पहनने योग्य हो जाता है। बुरा अन्न भी गरम होन
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"कहां है धर्म कहां है न्याय’’- देवासुर संग्राम Written by Rakesh Nath

धर्म ग्रन्थों में अनेक स्थानों पर देवासुर संग्राम का उल्लेख आता है। देवता स्वर्ग में विलासी जीवन बिताते थे और असुरों को छलबल से पराभूत करने के शड्यंत्र रचते रहते थे । असुरों को दुष्चरित्र सिद्ध करने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी गई है। जगह-जगह उनकी निंदा
 
स्वच्छ संदेश: हिन्दोस्तान की आवाज़
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क्योंकि रेवती हिन्दू थी, इसलिए प्रधान मंत्री की नींद नहीं उड़ी

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने ब्रिटेन में दो भारतीय मुस्लिम डाक्टरों के आतंकवादी गतिविधियों में पकड़े जाने पर मार्मिक अपील में ऐसी घटनाओं का पूरे समाज और कौम की गलत छवि बनाने के लिए इस्तेमाल न करने के लिए कहा। ये समाचार भी आए कि ऐसी बातों से उनको नींद न
 
Nataraj
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हिन्दू साम्प्रदायिकता का निवारण (Solution for Hindu Communalism)

साम्प्रदायिकता देश की अस्मिता के लिए बड़ी चुनौती बन चुकी है। यह देश इसी के कारण अनेक बार और अनेक वर्षों तक पराधीन रहा है। साम्प्रदायिकता राष्ट्रीय भावना के उदय होने में सबसे बड़ा अवरोध है। साम्प्रदायिकता से देश के लिए बहुत बड़ा संकट है। जब साम्प्रदाय
 
स्वच्छ संदेश: हिन्दोस्तान की आवाज़
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मनु स्मृति-आत्म नियंत्रण भी एक तरह से यज्ञ (manu smriti-self control as a yagya)

तानेके महायज्ञान्यज्ञशास्त्रविदो जनाः। अनीहमानाः सततमिंिद्रयेघ्वेव जुह्नति।। हिंदी में भावार्थ- शास्त्रों के ज्ञाता कुछ गृहस्थ उनमें वर्णित यज्ञों को नहीं करते पर अपनी इंद्रियों पर नियंत्रण रखते हैं। उनके लिये नेत्र,नासिका,जीभ,त्वचा तथा कान पर संयम र
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मालेगाँव विस्फोट से मुंतज़र अल जैदी तक

आज प्रातः काल जब एक प्रमुख अंग्रेजी दैनिक समाचार पत्र उठाकर देखा तो उसमें ठीक एक वर्ष पूर्व मालेगाँव में हुए विस्फोट में मारी गयी एक मुस्लिम बालिका के बारे में बताया गया था कि किस प्रकार उसके सपने अधूरे रह गये। सहानुभूति के इस ढंग पर मैं यह नहीं कहूँ
 
अमिताभ त्रिपाठी
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गंगा दशहरा

भविष्य पुराण में लिखा हुआ है कि, जो मनुष्य इस दशहरा के दिन गंगा के पानी में खड़ा होकर दस बार इस स्तोत्र को पढ़ता है चाहे वो दरिद्र हो, चाहे असमर्थ हो वह भी प्रयत्नपूर्वक गंगा की पूजा कर उस फल को पाता है।
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विश्व पटल पर रामायण

विश्व में रामकथा पर जितने ग्रन्थों की रचना हुई, उतने ग्रन्थ किसी भी भाषा में एक कथा पर नहीं लिखे गये। विश्व की विभिन्न भाषाओं में लगभग पांच सौ अलग-अलग प्रकार की रामायण प्रकाशित की जा चुकी है, जिनमें कुछ बहुत अधिक प्रसिद्ध हैं। प्रसतुत हैं संक्षिप्त ज
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नैतिक समाज की आवश्यकता

नई पीढ़ी में नैतिक संस्कारों की स्थापना संपूर्ण विश्व में अनैतिकता के कारण उत्पन्न अनेकों प्राणलेवा शारीरिक एवं मानसिक व्याधियों से समग्र विश्व की मुक्ति का पर्याय बनेगी।
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राम का नाम, असुरी काम

अगर गुण्डागर्दी ही करनी हो तो अलग बात है, क्योंकि इससे आसानी से दो-चार लोगो को पीट-पीटा कर संस्कृति की रक्षा करने की आत्म संतुष्टि पायी जा सकती है. वरना करने को बहुत सारे काम है.
 
संजय बेंगाणी