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संत कबीर के दोहे-शब्द वही है जो दिल में समाए (sant kabir ke dohe-shabd jo dil me samae)
सीखे सुनै विचार ले, ताहि शब्द सुख देय बिना समझै शब्द गहै, कछु न लोहा लेय संत शिरोमणि कबीरदास जी कहते हैं कि जो व्यक्ति अपने गुरूजनों से शब्द सीखकर उसे अपने हृदय में धारण कर उनका सदुपयोग करता है वही जीवन का आनंद उठा सकता है पर जो केवल उन शब्दों को रटत
Dec 28 2009 10:50 AM



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