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रोमन में हिन्दी और प्याले में तूफ़ान

रोमन में हिन्दी और वासुदेव गोस्वामी। वीरेन्द्र जैनअसगर वज़ाहत जैसे वरिष्ठ हिन्दी लेखक ने हिन्दी को बचाने के लिए जनसत्तामें दो लेख लिख कर ऐसी बहस छेड़ दी है कि बहुत सारे लोग उत्तेजित हुये घूम रहे हैं। उनका सुझाव था कि इस वैश्वीकरण के दौर में हिन्दी को रोमन
 
वीरेन्द्र जैन
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क्या अब पैदा नहीं होंगे देशभक्त ???

अगर हमें याद होगा तो आज का दिन हमारे लिए बहुत महत्वपुर्ण है। लेकिन मैं देख रहा हूँ कि आज का दिन हमारे मिडिया वर्ग व ब्लोगरो ने उपेक्षित रखा। आज ही के दिन सरदार भगत सिंह का जन्म हुआ था। कितनी शर्म की बात है कि इस अवसर पर कहीं भी कुछ देखने को न मिला। इ
 
Mithilesh dubey
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रोजगार और बाजार से जुड़ी हिंदी, जगा रही अपार संभावनाएं

-डॉ. अशोक प्रियरंजनहिंदी के प्रति अब नजरिया बदल रहा है । अब तक अंग्रेजी इसलिए ज्यादा पढ़ी जाती थी क्योंकि उसे रोजगार दिलाने में सहायक माना जाता था । अब हिंदी भी रोजगार और बाजार से जुड़ रही है। ऐसे में हिंदी के विस्तार की अपार संभावनाएं पैदा हो रही हैं ।
 
dr. ashok priyaranjan
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रचनात्मकता को विस्तार देते ब्लाग

-डॉ. अशोक प्रियरंजनचंडीगढ की डीएवी कॉलेज मैनेजिंग कमेटी ने ब्लाग का जिस तरह से उपयोग करने की योजना बनाई है, वह दूसरे विद्यालयों के लिए अनुकरणीय हो सकता है । कमेटी ने तय किया है कि अब शिक्षक क्लास में तो पढ़ाएंगे ही, साथ ही रोजाना ब्लाग के माध्यम से
 
dr. ashok priyaranjan